750 भारतीय स्कूली छात्राओं की मेहनत से बना उपग्रह

अब पृथ्वी की कक्षा ISS के पास परिक्रमा कर रहा

  • 750 छात्राओं का प्रोजेक्ट, पहली बार असफल, दूसरी बार सफलता
  • उनका बनाया उपग्रह अब ISS के पास पृथ्वी की कक्षा में
  • Space Kidz India, ISRO और देशभर के स्कूलों की भागीदारी
  • महिला सशक्तिकरण और भारत की विज्ञान शिक्षा में ऐतिहासिक मील का पत्थर

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली | 30 जुलाई :
AzaadiSAT परियोजना के तहत भारत की 750 छात्राओं का पहला प्रयोग वर्ष 2022 में नाकाम रहा था, लेकिन अब इन्हीं छात्राओं के बनाए नए उपग्रह ने अंतरिक्ष में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। ISRO ने बताया कि अब यह उपग्रह अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के पास पृथ्वी की कक्षा में घूम रहा है।

AzaadiSAT प्रोजेक्ट की खास बातें:

  • देशभर के 75 स्कूलों की 750 छात्राओं ने Space Kidz India की मदद से छोटे-छोटे वैज्ञानिक प्रयोग तैयार किए।
  • पहली लॉन्च (2022) में SSLV रॉकेट सफलतापूर्वक उड़ा, लेकिन सही गति/दिशा नहीं मिलने से सेटेलाइट अस्थिर कक्षा में चला गया और लौट आया।
  • ISRO ने विफलता से सबक लेते हुए सिस्टम में बदलाव किए—रॉकेट पार्ट्स, नेविगेशन प्रोग्राम और कंपन सुरक्षा तंत्र में सुधार किया।
  • फरवरी 2023 की दूसरी लॉन्च में AzaadiSAT 2, EOS 07 और Janus 1 सफलतापूर्वक 450 किमी की सर्कुलर कक्षा में स्थापित किए गए।

उपलब्धि का महत्व:

  • यह कक्षा ISS के आसपास है, जहां आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन भी मौजूद रहता है।
  • 750 छात्राओं ने छोटे-छोटे पेलोड तैयार किए—जैसे रेडिएशन काउंटर, रेडियो कम्युनिकेशन सिस्टम, ट्रांसमीटर और सेल्फी कैमरा।
  • सभी पेलोड्स को Space Kidz India की टीम ने अंतिम रूप से इंटीग्रेट किया, ISRO ने लॉन्चिंग की जिम्मेदारी संभाली।

लक्ष्य:

  • परियोजना का उद्देश्य लड़कियों को विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) से जोड़ना था।
  • छात्राओं को किताबों की जगह असली सैटेलाइट हार्डवेयर, सेंसर, एनर्जी, संचार और मटीरियल रेसिस्टेंस जैसे मसलों की मैदानी जानकारी मिली।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.