प्रधानमंत्री की भाषा पर बदलाव का रंग

राकेश अचल

देश बदल रहा है या नहीं लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र दामोदर मोदी की भाषा जरूर बदल रही हैI जब भाषा सनातनी और स्वदेशी होना चाहिए थी तब प्रधानमंत्री की भाषा पर जेन-जी का रंग चढ रहा है I प्रातं:स्मरणीय, देवतुल्य प्रधानमंत्री का ताजा इंस्टाग्राम वीडियो देखने के बाद मैं भारत के प्रधानमंत्रियों की संबोधन की भाषा का अध्ययन करने पर विवश हो गया I  मैने आभासी माध्यमों पर उपलब्ध भारत के सभी 13 प्रधानमंत्रियों के सार्वजनिक भाषणों का बारीकी से अध्ययन किया और पाया कि माननीय नरेंद्र दामोदर मोदी देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिनकी संबोधन की भाषा में चमत्कारिक ढंग से बदलाव आया हैI

भारत के प्रमुख और लोकप्रिय प्रधानमंत्रियों के जमाने में इंटरनेट और जेन-जी नहीं थी I पंडित जवाहरलाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, श्रीमती इंदिरा गांधी, मोरारजी देसाई से लेकर डा. मनमोहन सिंह देशवासियों को संबोधन के लिए-‘मेरे प्यारे देशवासियो ‘ ‘ भाइयो-बहनों ‘का इस्तेमाल करते थेI एचडी देवेगौडा इसका अपवाद रहे क्योंकि उन्हे हिंदी नही आती थीI अहिंदी भाषी पीव्ही नरसिम्हाराव तक प्यारे देशवासियो ही कहते थेI भारत के मौजूदा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र दामोदर मोदी भी 25 जुलाई 2026 तक देशवासियों को ‘प्यारे भाइयों -बहनो’ कहकर ही संबोधित करते थे, लेकिन जिस दिन से जंतर-मंतर के आंदोलन के सामने सरकार ने घुटने टेके हैं और शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा कराया है, उसी दिन से भारतीय प्रधानमंत्री की भाषा बदल गई हैI 

मोदीजी ने अपने पहले इंस्टाग्राम वीडियो में देश को नहीं केवल जेन-जी को संबोधित किया और ‘डियर फ्रेंड्स ‘शब्द का इस्तेमाल किया I मोदी जी के नवीनतम वीडियो में भी संबोधन में ‘फ्रेंड्स ‘ शब्द ही सुनने में आया. इस हिसाब से माननीय मोदीजी पहले प्रधानमंत्री हुए जिनकी जबान के साथ ही देह की भाषा बदली हैI नयी पीढी (जिसे उनकी पार्टी की सुदर्शना सांसद ‘गटर पीढी’कहती हैं ) के दबाव में किसी प्रधानमंत्री को भाषा बदलते हुए देश ने पहली बार देखा हैI मानसिक दबाव से गुजर रहे माननीय प्रधानमंत्री दया के पात्र हैंI मेरी उनके प्रति सहानुभूति है और मैं मानता हूँ कि उन्होने जेन-जी यानि गटर जनरेशन से संवाद स्थापित करने के लिए उन्ही की भाषा सीखने की कोशिश की है. हर कोशिश में एक आशा छिपी रहती है I

मुमकिन है कि मोदीजी भाषा और संबोधन बदलकर जेन जी को कोकरोच जनता पार्टी, कांग्रेस और राहुल गांधी से छीन लें. पंत प्रधान की भाषा पर झलकते दबाव से एक बात और प्रमाणित हुई है कि प्रधानमंत्री जी को अब जेन-जी के हमलों का डर सताने लगा हैI उन्होंने अपने नये वीडियो में जंतर-मंतर की कथित गालीबाज जेन-जी को गालियां देने का उल्हाना भी दिया और कहा कि गालीबाजों ने उन्हे तो गालियां दी हीं उनकी दिवंगत माँ को भी नहीं छोडा, फिर भी मैं सबको माफ करता हूँ. मतलब मोदीजी जेन-जी पर अहसान जता रहे हैंI

लेकिन सब जानते हैं कि जंतर-मंतर पर आंदोलन के दौरान जिन लोगों के विरुद्ध मुकदमे दर्ज किए गए, उन्हे अब तक वापस नहीं लिया गया. उदारमना मोदीजी ने जेन-जी से आंदोलन के दौरान पेलेट गन, लाठी, आंसूगैस के इस्तेमाल के लिए भी माफी नहीं मांगी.मोदीजी माफी मांगने के आदी नहीं हैं. उन्होने पिछले बारह साल में अपनी तमाम गलतियों, सरकार की ओर से की जाने वाली ज्यादतियों के लिए केवल एक बार किसानों से माफी मांगी थी जिसका मलाल शायद उन्हे जीवनपर्यंत रहेगा I काबिलेगौर बात ये है कि प्रधानमंत्री अब संसद से संवाद करने से बच रहे हैंI उन्होने इंस्टाग्राम को ही संसद मान लिया है लेकिन उनकी सरकार और पार्टी में ऐसा कोई मार्गदर्शक नहीं है जो मोदीजी को संसद और इंस्टाग्राम का भेद और महत्ता समझा सके I

यदि कोई मोदीजी को हटकने वाला होता तो उन्हे ससद की इरादतन अनदेखी करने से सप्रास रोक लेता  बहरहाल अब वो दिन दूर नहीं जब देश को प्रधानमंत्री का भाषण सुनने के लिए दूरदर्शन या संसद टीवी नहीं बल्कि इंस्टाग्राम पर निर्भर होना पडेगा I और देश के चौथे स्तंभ को भी मोदीजी के भाषणों की प्रति इंस्टाग्राम से उधार लेना पडेगी I 

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