ध्रुव राठी राठी का असली नाम बदरु रसीद हिन्दू पहचान सहारे रोजी रोटी
राठी का असली नाम बदरु रसीद, फेक नैरेटिव और डीप स्टेट फंडिंग
- कई दावे: राठी का असली नाम बदरु रसीद? मुस्लिम या ईसाई पृष्ठभूमि? जन्म पाकिस्तान के लाहौर में?
- आरोप: प्रधानमंत्री मोदी और सनातन सभ्यता के खिलाफ प्रोपगंडा, जॉर्ज सोरोस की फंडिंग।
- राठी का दावा: खुद को हिंदू/भारतीय बता कर पहचान बनाना, लेकिन वास्तविकता संदिग्ध।
- यूट्यूब पर करोड़ों की कमाई, मार्केट में फेक नैरेटिव के बावजूद लोकप्रियता।
पूनम शर्मा
ध्रुव राठी—यूट्यूब का एक जाना-पहचाना नाम, लेकिन उतना ही विवादास्पद चेहरा भी। उनके वीडियो भारत ही नहीं, दुनिया भर में लाखों लोग देखते हैं। राठी खुद को भारतीय, हिंदू और प्रगतिशील विचारों का समर्थक बताते हैं।
लेकिन सोशल मीडिया पर उनके बारे में अनेक रहस्यमयी दावे वायरल हो रहे हैं—कहा जाता है कि वे असल में भारतीय नागरिक नहीं हैं।
नाम भले ध्रुव राठी हो, लेकिन असली पहचान को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं। सोशल मीडिया स्रोतों के मुताबिक (जिसकी पुष्टि नहीं की जा सकती), इजरायली खुफिया एजेंसी ‘मोसाद’ के हवाले से आरोप लगाया गया कि ध्रुव राठी का असली नाम बदरु रसीद या बदरुद्दीन रशीद लाहोरी है और उनका जन्म पाकिस्तान के लाहौर में हुआ। उनकी पत्नी जूली (जिसे कुछ लोग जुलेखा बताते हैं) भी पाकिस्तानी मुसलमान हैं।
आरोप यह भी है कि ध्रुव राठी को जर्मनी, पाकिस्तान, चीन, दुबई, मालदीव, कनाडा, रूस, तुर्की आदि देशों से फंडिंग मिलती है, जिसमें जॉर्ज सोरोस की डीप स्टेट नेटवर्क की मदद भी शामिल है। राठी हिंदू नाम रखकर भारत में नरेंद्र मोदी और सनातन संस्कृति के खिलाफ प्रोपगंडा फैलाते हैं। राठी पर यह भी आरोप लगता है कि वे हर महीने सिर्फ यूट्यूब से करोड़ों रुपये कमा रहे हैं, जबकि उनकी असली पहचान, नागरिकता और विचारधारा पर परदा डाला जाता है। फिर भी,उनके समर्थक और विरोधी—दोनों ही उनके वीडियो देखने को मजबूर हैं। । सोशल मीडिया का ‘फेक नैरेटिव’ प्रोडक्ट अपने आप में एक अनूठी सेलिंग पॉइंट बन चुका है। यूट्यूब भी हिन्दू विरोधी कॉन्टेन्ट को आगे बढ़ाता है जिसका लाभ ध्रुव राठी उठाते हैं ।
सवाल यह भी है कि राठी जैसे ‘फेक नैरेटिव’ चलाने वाले लोग भारतीय समाज में कैसे लोकप्रिय हो जाते हैं? क्या सच में झूठ सुनने का अलग मजा है? या फिर यह डिजिटल युग का नया ट्रेंड है, जहां सच्चाई से ज्यादा फेक कंटेंट बिकता है? ध्रुव राठी की गुत्थी, उनकी कथित पहचान, विदेशी फंडिंग और झूठे नैरेटिव—इस पूरे विवाद ने भारतीय सोशल मीडिया को दो हिस्सों में बाँट दिया है। एक तरफ वे लोग हैं जो उन्हें फेक मानते हैं, दूसरी तरफ वे जिनके लिए राठी ‘सच बोलने वाले’ बन चुके हैं।
असल में, ध्रुव राठी सोशल मीडिया का एक रहस्यमयी उत्पाद हैं—फेक नैरेटिव चलाने के बावजूद लोकप्रियता की ऊंचाइयों पर हैं। शायद उनकी असली खासियत यही है कि वे झूठ को भी ‘मनोरंजन’ और ‘सूचना’ के नाम पर बेच देते हैं, और करोड़ों लोग इसे खरीद भी लेते हैं। यह नए जमाने का ‘सच्चा-झूठा’ पॉपुलर कल्चर है .
Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.