PM मोदी का I-Day संदेश—‘दिमागी नक्सल’ को पहचानें, अलग करें

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर ‘दिमागी नक्सल’ की चेतावनी दी—कहा, इन्हें पहचानना और अलग करना जरूरी।
  • बोले—जंगलों में बंदूक उठाने वाले नक्सलियों का सफाया, अब सत्ता के गलियारों में छिपे ‘विचारधारा वाले’ सक्रिय।
  • 3,500 से ज्यादा सुरक्षा कर्मियों ने नक्सल हिंसा में देश के लिए जान दी; कई इलाके नक्सलमुक्त और विकास के रास्ते पर।
  • मोदी ने कहा—देश के युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ना जरूरी; नक्सली सोच से समाज को बचाएँ और विकसित भारत बनाएं।

समग्र समाचार सेवा 

नई दिल्ली, 15 अगस्त :प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से देश को संबोधित करते हुए ‘दिमागी नक्सल’ (Intellectual/Mindset Naxal) की चुनौती का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जहां एक ओर जंगलों में बंदूक के जोर पर नक्सली आंदोलन कमजोर हुआ है, वहीं अब सत्ता के गलियारों में छिपे ‘दिमागी नक्सल’ देश के युवाओं को भटकाने की कोशिश में हैं।

मोदी ने कहा—“जब हम 2014 में सरकार में आए, तो देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का संकल्प लिया। आज खुशी है कि माओवादी हिंसा आखिरी सांसें गिन रही है। लेकिन अब नक्सल मानसिकता के लोग सरकारी समितियों, सलाहकार मंडल, नीति निर्माण और विश्वविद्यालयों में घुसपैठ कर समाज में भ्रम और असंतोष फैलाने में लगे हैं।”

प्रधानमंत्री ने बताया कि 3,500 से अधिक सुरक्षाकर्मियों ने नक्सली हिंसा में देश की रक्षा करते हुए अपनी जान दी, यह आंकड़ा युद्ध में शहीदों से भी ज्यादा है। उन्होंने कहा कि देश के कई क्षेत्र, जो कभी लाल आतंक के चपेट में थे, अब विकास के नए केंद्र बन चुके हैं।

मोदी ने जोर देकर कहा—“इन ‘दिमागी नक्सलियों’ को पहचानना और अलग करना जरूरी है, ताकि भारत के युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ा जा सके और देश को विकसित बनाने के लक्ष्य की ओर बढ़ाया जा सके।”

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