पंजाब में अकेले चुनाव लड़ेगी BJP, अकाली दल से गठबंधन मुश्किल
बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महासचिव बीएल संतोष के बयान से साफ हुई रणनीति, पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले ताल ठोकने की तैयारी।
- भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी।
- शिरोमणि अकाली दल (SAD) के साथ दोबारा गठबंधन की अटकलों के बीच पार्टी के इस रुख ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।
- दोनों दलों के बीच सीटों के बंटवारे और ‘बड़े भाई’ की भूमिका को लेकर बनी असमंजस की स्थिति गठबंधन की राह को मुश्किल बना रही है।
चंडीगढ़: पंजाब की राजनीति में एक बार फिर बड़े सियासी बदलाव के संकेत मिलने शुरू हो गए हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों में किसी भी दल के साथ गठबंधन करने के बजाय अकेले ही मैदान में उतरने के स्पष्ट संकेत दे दिए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महासचिव बीएल संतोष के दौरे और उनके बयानों से यह साफ हो गया है कि बीजेपी राज्य की सभी 117 सीटों पर अपनी पूरी ताकत झोंकने की तैयारी कर रही है। इस राजनीतिक कदम के बाद से शिरोमणि अकाली दल (SAD) के साथ दोबारा पुराने गठबंधन की संभावनाओं पर ब्रेक लगता नजर आ रहा है।
क्यों मुश्किल हो रहा है SAD और BJP का पुनर्मिलन?
अकाली दल और बीजेपी का पुराना गठबंधन साल 2020 में कृषि कानूनों को लेकर हुए विवाद के बाद टूट गया था। हालांकि, पिछले कुछ समय से दोनों दलों के बीच नजदीकियों और दोबारा हाथ मिलाने की चर्चाओं ने जोर पकड़ा था, खासकर सुखबीर सिंह Badal की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद। लेकिन गठबंधन की राह में सबसे बड़ा रोड़ा ‘बड़े भाई’ की भूमिका और सीटों के बंटवारे का फॉर्मूला बन गया है। पुराने समय में अकाली दल अधिकांश सीटों पर चुनाव लड़ता था और बीजेपी जूनियर पार्टनर के रूप में सीमित सीटों पर उतरती थी। अब बीजेपी अपनी संगठनात्मक स्थिति को मजबूत मानकर अपने दम पर विस्तार करना चाहती है, जिसे अकाली दल स्वीकार करने में हिचकिचा रहा है।
संगठनात्मक विस्तार और बूथ स्तर पर पकड़ मजबूत करने पर जोर
बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व अब पंजाब में अपनी स्थिति को केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित न रखकर ग्रामीण और सिख बहुल इलाकों में भी मजबूत करना चाहता है। हाल ही में पार्टी के शीर्ष नेताओं ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पार्टी कार्यकर्ताओं को सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों के लिए अभी से जमीनी स्तर पर तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। बूथ स्तर पर कमेटियों का गठन, पन्ना प्रमुखों की नियुक्ति और केंद्र सरकार की योजनाओं को घर-घर तक पहुँचाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि राज्य में पार्टी का स्वतंत्र जनाधार तैयार किया जा सके।
चतुष्कोणीय मुकाबले की ओर बढ़ता पंजाब का राजनीतिक रण
यदि बीजेपी अपने इस अकेले चुनाव लड़ने के फैसले पर कायम रहती है, तो आने वाले विधानसभा चुनाव बेहद दिलचस्प और बहुकोणीय (Four-cornered contest) हो सकते हैं। राज्य में पहले से ही आम आदमी पार्टी (AAP), कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी के बीच मुकाबला तय माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि अलग-अलग चुनाव लड़ने से वोटों का बिखराव हो सकता है, लेकिन बीजेपी का यह दांव भविष्य में उसे राज्य की मुख्य राजनीतिक ताकत के रूप में स्थापित करने की एक बड़ी रणनीतिक चाल भी हो सकता है।
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