दिल्ली में कूड़े के पहाड़ों का सफाया, 70 लाख मीट्रिक टन कचरा खत्म
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने वीडियो जारी कर बताया कि कैसे वैज्ञानिक तरीकों और सुनियोजित रोडमैप की बदौलत राजधानी को कचरे के ढेरों से मुक्त कराया जा रहा है।
- दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक वीडियो जारी कर बताया कि ओखला में 70 लाख मीट्रिक टन कचरे का सफलतापूर्वक निपटान किया गया है।
- वैज्ञानिक रोडमैप और समय-सीमा के तहत काम करते हुए भालस्वा और गाजीपुर समेत विभिन्न लैंडफिल साइट्स से कुल 100 एकड़ जमीन वापस हासिल की गई है।
- सरकार ने भविष्य में कचरे के नए पहाड़ न बनने देने के लिए चार नए कचरे से ऊर्जा बनाने वाले प्लांट लगाने की पूरी तैयारी कर ली है।
नई दिल्ली, 31 अगस्त: देश की राजधानी दिल्ली लंबे समय से बड़े-बड़े कचरे के पहाड़ों (लैंडफिल साइट्स) की समस्या से जूझ रही थी। लेकिन अब सरकार के दृढ़ इच्छाशक्ति वाले कदमों के चलते स्थिति तेजी से बदल रही है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक आधिकारिक वीडियो जारी करते हुए इस बात की जानकारी दी है कि किस प्रकार उनकी सरकार ने एक कठिन चुनौती को पार करते हुए ओखला में 70 लाख मीट्रिक टन कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान कर दिखाया है। शुरुआत में लोगों को इस बड़े वादे के पूरा होने पर संदेह था, लेकिन सरकार के तय समय-सीमा और ठोस कार्ययोजना ने इसे जमीन पर उतार कर साबित कर दिया।
ओखला से लेकर भालस्वा तक हुआ बड़ा बदलाव
मुख्यमंत्री ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि राजधानी की विभिन्न लैंडफिल साइटों पर युद्धस्तर पर काम किया गया है। केवल ओखला में ही 70 लाख मीट्रिक टन कचरे को प्रोसेस करके हटाया गया है, जिसके परिणामस्वरूप 35 एकड़ बहुमूल्य जमीन पूरी तरह से वापस मिल गई है। इसके अलावा भालस्वा साइट पर लगभग 102 लाख मीट्रिक टन कचरे का निस्तारण करते हुए 45 एकड़ जमीन को मुक्त कराया गया है। गाजीपुर में भी लगभग 44 लाख मीट्रिक टन कचरे को प्रोसेस किया गया है। कुल मिलाकर तीनों प्रमुख साइटों से लगभग 2.16 करोड़ मीट्रिक टन कचरे का सफाया किया जा चुका है और लगभग 100 एकड़ जमीन को पुनर्चक्रित कर वापस प्राप्त किया गया है।
कचरे से उपयोगी सामग्री का निर्माण और उपयोग
इस पूरी प्रक्रिया में केवल कचरा हटाने पर ही जोर नहीं दिया गया, बल्कि रीसाइक्लिंग के जरिए पर्यावरण अनुकूल तरीकों का भी इस्तेमाल किया गया है। गाजीपुर और अन्य साइटों पर प्रोसेसिंग के बाद जो अक्रिय (इनेर्ट) सामग्री बची है, उसका उपयोग बेहद रचनात्मक कार्यों में किया जा रहा है। इस रीसाइक्लिंग सामग्री का इस्तेमाल निचले इलाकों को भरने और सड़कों के निर्माण के दौरान बेस तैयार करने के लिए किया जा रहा है। इससे न केवल कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन सुनिश्चित हुआ है, बल्कि निर्माण कार्यों में भी बड़ी मदद मिली है।
भविष्य की योजना: कचरे के नए पहाड़ नहीं बनने देंगे
राजधानी में पर्यावरण सुधार और नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में यह एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया कि सरकार की यह सफलता यहीं नहीं रुकेगी, बल्कि भविष्य के लिए एक पुख्ता कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। आने वाले समय में कचरे से ऊर्जा (Waste-to-Energy) बनाने वाले चार नए अत्याधुनिक प्लांट स्थापित किए जाएंगे। इन प्लांट्स के शुरू हो जाने के बाद रोजाना पैदा होने वाले कचरे का तुरंत उसी गति से निस्तारण हो जाएगा, जिससे भविष्य में दिल्ली में कभी भी कचरे के नए पहाड़ नहीं बन पाएंगे।
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