BRICS के 20 साल पूरे, जारी हुई स्पेशल डाक टिकट
ब्रिक्स ने पूरे किए सहयोग के 20 शानदार साल, नई दिल्ली में जारी हुए स्मारक डाक टिकट
कुमार राकेश
नई दिल्ली, 13 सितंबर: नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के अवसर पर वैश्विक कूटनीति, आपसी सहयोग और बहुपक्षीय साझेदारी के एक नए और ऐतिहासिक अध्याय का जश्न मनाया गया। इस महत्वपूर्ण वैश्विक आयोजन के इतर, ब्रिक्स (BRICS) देशों के बीच दो दशकों की मजबूत और निरंतर साझेदारी को रेखांकित करते हुए दो विशेष स्मारक डाक टिकट (Commemorative Postage Stamps) जारी किए गए। यह आयोजन न केवल इस प्रभावशाली समूह की दो दशक लंबी यात्रा का प्रतीक है, बल्कि भविष्य की साझा समृद्धि के प्रति इसके संकल्प को भी पुख्ता करता है।
सहयोग के दो दशक: 2006 से 2026 का सफर
जारी किए गए इन दोनों डाक टिकटों पर स्पष्ट रूप से “ब्रिक्स: सहयोग के दो दशक, 2006–2026” (BRICS: Two Decades of Cooperation, 2006–2026) अंकित किया गया है। यह टिकट पिछले बीस वर्षों में ब्रिक्स के क्रमिक विकास और वैश्विक पटल पर संवाद, आर्थिक सहयोग तथा आपसी भरोसे के एक प्रमुख मंच के रूप में इसके उभार को दर्शाते हैं। वर्ष 2006 में अपनी शुरुआती नींव से लेकर आज दुनिया की एक बड़ी आर्थिक और रणनीतिक शक्ति के रूप में विकसित होने तक, ब्रिक्स ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है।
भारत की अध्यक्षता और मुख्य थीम की झलक
इन विशेष डाक टिकटों के डिजाइन और परिकल्पना में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता (BRICS Chairship 2026) की प्राथमिकताओं को बहुत ही खूबसूरती से उकेरा गया है। वर्ष 2026 के लिए भारत की अध्यक्षता की मुख्य थीम — “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता” (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) — इन डाक टिकटों के मूल भाव में साफ तौर पर झलकती है। यह थीम समकालीन वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए सदस्य देशों के बीच सुदृढ़ सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर देती है।
पारस्परिक सम्मान और ‘मानवता प्रथम’ का दृष्टिकोण
इन दोनों डाक टिकटों के अलग-अलग डिजाइन विशेष संदेश देते हैं:
पहला डाक टिकट: यह टिकट ब्रिक्स के उस मूल आधार का प्रतिनिधित्व करता है, जिसकी नींव आपसी सम्मान, गहरी समझ और अटूट एकजुटता पर टिकी है। यह इस बात का प्रतीक है कि कैसे अलग-अलग सांस्कृतिक और आर्थिक पृष्ठभूमियों वाले देश वैश्विक कल्याण के लिए एक मंच पर आए हैं।
दूसरा डाक टिकट: इसमें आधिकारिक ब्रिक्स लोगो के साथ-साथ भारत की अध्यक्षता के उस विशेष दृष्टिकोण को शामिल किया गया है जो “मानवता प्रथम” (Humanity First) और जन-केंद्रित (People-centric approach) विकास पर आधारित है। यह डिजाइन इस बात की वकालत करता है कि वैश्विक नीतियों के केंद्र में हमेशा आम नागरिक और मानवीय मूल्य होने चाहिए।
वैश्विक मंच पर सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व
डाक टिकटें हमेशा से इतिहास, कूटनीति और महत्वपूर्ण मील के पत्थरों को चिरस्थायी बनाने का एक सशक्त माध्यम रही हैं। ब्रिक्स के दो दशकों के सफर को इन डाक टिकटों के जरिए अमर करना यह साबित करता है कि सदस्य देश न केवल रणनीतिक मोर्चे पर, बल्कि सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक स्तर पर भी एक-दूसरे के साथ गहराई से जुड़े हुए हैं। नई दिल्ली में इन टिकटों का विमोचन इस बात का गवाह है कि भारत ने इस मंच पर वैश्विक शांति, विकास और समावेशिता के एजेंडे को किस प्रकार सबसे आगे रखा है।
निष्कर्ष
ब्रिक्स सहयोग के 20 वर्ष पूरे होने के अवसर पर जारी किए गए ये स्मारक डाक टिकट केवल कागज के छोटे टुकड़े नहीं हैं, बल्कि यह दुनिया के सबसे तेजी से उभरते हुए बहुपक्षीय समूहों में से एक की सफलता की कहानी बयां करते हैं। जैसे-जैसे ब्रिक्स नई ऊंचाइयों को छू रहा है, भारत की यह पहल आने वाले वर्षों में सदस्य देशों के बीच एकता, आपसी विश्वास और सतत विकास के नए आयाम गढ़ने का काम करेगी।
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