इस सदी में दुनिया की नंबर-1 इकोनॉमी बनेगा भारत
अमेरिकी अर्थशास्त्री जेफ्री सैश का बड़ा अनुमान, कहा- वैश्विक आर्थिक शक्ति का केंद्र तेजी से एशिया की ओर स्थानांतरित हो रहा है।
- अमेरिकी अर्थशास्त्री जेफ्री सैश ने अनुमान जताया है कि भारत अगले 25 वर्षों में अमेरिका को पीछे छोड़कर दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।
- उनके अनुसार, इस सदी के दौरान भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी और नंबर-1 अर्थव्यवस्था बनने की पूरी क्षमता है।
- सैश ने वैश्विक आर्थिक शक्ति का केंद्र पुन: एशिया की ओर लौटने की बात कहते हुए भारत और चीन के बीच बेहतर आर्थिक सहयोग को जरूरी बताया है।
नई दिल्ली, 14 सितंबर: भारतीय अर्थव्यवस्था की तेज रफ्तार और इसकी विकास संभावनाओं को लेकर दुनिया भर के दिग्गजों ने अपनी मुहर लगानी शुरू कर दी है। कोलंबिया विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित प्रोफेसर और जाने-माने अमेरिकी अर्थशास्त्री जेफ्री सैश (Jeffrey Sachs) ने एक साक्षात्कार के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर बेहद सकारात्मक और बड़ा अनुमान व्यक्त किया है। उनका मानना है कि वर्तमान विकास trajectory को देखते हुए भारत आगामी 25 वर्षों के भीतर अमेरिका को पीछे छोड़ देगा और इस सदी के अंत तक दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित हो जाएगा। वैश्विक स्तर पर बदलते भू-राजनीतिक और आर्थिक समीकरणों के बीच इस तरह का दावा भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत को रेखांकित करता है।
एशिया की ओर लौट रहा वैश्विक अर्थव्यवस्था का केंद्र
जेफ्री सैश के अनुसार, दुनिया के आर्थिक गुरुत्वाकर्षण का केंद्र एक बार फिर एशिया की तरफ लौट रहा है, जहां यह ऐतिहासिक रूप से दो हजार वर्षों तक केंद्रित रहा था। औद्योगिक क्रांति के बाद भले ही यह केंद्र पश्चिम की ओर शिफ्ट हो गया था, लेकिन अब भारत और चीन जैसी एशियाई महाशक्तियां इसे पुनः एशिया की तरफ मोड़ रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत इस समय दुनिया की प्रमुख बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाला देश है। देश की विशाल आबादी, लगातार बढ़ता हुआ घरेलू बाजार और जनसांख्यिकी लाभांश (Demographic Dividend) इसे दुनिया में सबसे अलग और मजबूत स्थिति प्रदान करते हैं।
भारत और चीन के बीच सहयोग की महत्ता
अर्थशास्त्री ने भारत और चीन के संबंधों को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों में से एक करार दिया है। हालांकि उन्होंने दोनों देशों के बीच सीमा विवाद और आपसी अविश्वास के इतिहास को नकारा नहीं है, लेकिन साथ ही यह भी तर्क दिया कि दोनों देशों के पास रणनीतिक और आर्थिक रूप से जुड़ने के मजबूत आधार हैं। सैश का मानना है कि यदि भारत और चीन व्यापार, तकनीकी साझेदारी और औद्योगिक संयुक्त उद्यमों (Joint Ventures) के क्षेत्र में मिलकर काम करते हैं, तो इससे दोनों देशों की विकास गति को और अधिक बल मिलेगा। इस प्रकार का सहयोग वैश्विक मंच पर एक बहुध्रुवीय व्यवस्था (Multipolar Order) को मजबूत करने में सहायक होगा।
बहुध्रुवीय दुनिया और BRICS की भूमिका
आज की वैश्विक व्यवस्था अब एकध्रुवीय नहीं रही है। सैश के अनुसार दुनिया में अमेरिका, रूस, भारत और चीन प्रमुख महाशक्तियों के रूप में उभर चुके हैं, जिन्हें वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए मिलकर काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने BRICS जैसे अंतरराष्ट्रीय समूहों के बढ़ते प्रभाव का भी जिक्र किया और कहा कि ऐसे संगठन पश्चिमी देशों के एकाधिकार को संतुलित करते हुए वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में निष्पक्षता और बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ावा दे सकते हैं। भारत की दूरदर्शी नीतियां और लगातार सुधरता बुनियादी ढांचा इसे आने वाले दशकों में वैश्विक नेतृत्व की श्रेणी में सबसे आगे खड़ा कर रहा है।
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