असम-मेघालय सीएम की EAPs को गति देने की मांग

पूर्वोत्तर भारत में बुनियादी ढांचे और आर्थिक विकास को मजबूत करने के लिए बाहरी सहायता प्राप्त परियोजनाओं पर जोर, केंद्र सरकार से मिलाया हाथ।

  • असम और मेघालय के मुख्यमंत्रियों ने बाहरी सहायता प्राप्त परियोजनाओं (EAPs) को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार से विशेष आग्रह किया है।
  • इन विकास परियोजनाओं का उद्देश्य पूर्वोत्तर राज्यों में बुनियादी ढांचे, सड़क संपर्क और आजीविका के अवसरों को मजबूत करना है।
  • दोनों राज्यों के नेताओं ने क्षेत्रीय विकास और आर्थिक प्रगति को गति देने के लिए प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने पर जोर दिया है।

गुवाहाटी / शिलोंग, 14 सितंबर: पूर्वोत्तर भारत के दो प्रमुख राज्यों—असम और मेघालय—के मुख्यमंत्रियों ने अपने-अपने राज्यों में चल रही और प्रस्तावित बाहरी सहायता प्राप्त परियोजनाओं (Externally Aided Projects – EAPs) के क्रियान्वयन में तेजी लाने के लिए एक संयुक्त और ठोस पहल की है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों जैसे विश्व बैंक (World Bank) और एशियाई विकास बैंक (ADB) के सहयोग से चलाई जाने वाली इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य पूर्वोत्तर क्षेत्र में सड़क नेटवर्क, जल प्रबंधन, शहरी बुनियादी ढांचे और ग्रामीण आजीविका के साधनों को सुदृढ़ करना है। हाल ही में हुई उच्चस्तरीय बैठकों और वार्ताओं के दौरान दोनों राज्यों के शीर्ष नेतृत्व ने इस बात पर विशेष बल दिया है कि इन महत्वपूर्ण विकास कार्यों में आने वाली प्रशासनिक और वित्तीय बाधाओं को शीघ्र दूर किया जाए।

बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी का विस्तार

पूर्वोत्तर राज्यों की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए मजबूत बुनियादी ढांचा और कनेक्टिविटी का होना अत्यंत आवश्यक है। असम और मेघालय के बीच कई सीमावर्ती इलाके ऐसे हैं जहां आवागमन और परिवहन की बेहतर सुविधाएं न होने के कारण स्थानीय अर्थव्यवस्था पूरी तरह विकसित नहीं हो पा रही है। EAPs के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता का उपयोग मुख्य रूप से अंतर-राज्यीय सड़कों, ग्रामीण पुलों, बाढ़ नियंत्रण प्रणालियों और आधुनिक लॉजिस्टिक्स केंद्रों के निर्माण के लिए किया जा रहा है। दोनों मुख्यमंत्रियों ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे इन परियोजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा करें ताकि तय समयसीमा के भीतर कार्यों को धरातल पर उतारा जा सके।

आर्थिक विकास और रोजगार के नए अवसर

बाहरी सहायता प्राप्त इन परियोजनाओं का दायरा केवल कंक्रीट के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर भी पड़ता है। जब कृषि, पर्यटन, और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक और वैश्विक निवेशकों का सहयोग मिलता है, तो राज्य के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान मिलती है। असम और मेघालय के मुख्यमंत्रियों ने केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के साथ समन्वय स्थापित कर फंडिंग प्रक्रिया को सरल बनाने का आग्रह किया है ताकि किसी भी परियोजना के फंड रिलीज होने में अनावश्यक देरी न हो।

पूर्वोत्तर के विकास का नया विजन

भारत सरकार की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ (Act East Policy) के तहत पूर्वोत्तर राज्यों को दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ व्यापारिक और सांस्कृतिक रूप से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। असम और मेघालय इस पूरी रणनीति के केंद्र में हैं। दोनों राज्यों द्वारा EAPs को गति देने के लिए उठाया गया यह कदम क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन परियोजनाओं को निर्धारित समय पर पूरा कर लिया जाता है, तो इससे न केवल स्थानीय नागरिकों का जीवन स्तर सुधरेगा, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में औद्योगिक निवेश का एक अनुकूल माहौल भी तैयार होगा।

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