जन जन की भाषा हिंदी

✍🏻 पार्थसारथि थपलियाल

 

हिंदी भारत की भाषा है,
जन-जन के मन की आशा है।
माटी की महक, संस्कृति की धारा,
भारत की यह अभिलाषा है।

गंगा-सी निर्मल, सरिता-सी पावन,
हर हृदय में इसका वास रहे।
शब्द-शब्द में अपनापन झलके,
हर अधर पर इसका उजास रहे।

उत्तर से लेकर दक्षिण तक,
पूरब से पश्चिम तक जाए।
भाषाओं के मधुर मिलन में,
एकता का संदेश सुनाए।

ज्ञान-विज्ञान की राह दिखाए,
साहित्य-सृजन की पहचान बने।
विश्व-पटल पर गौरव से गूँजे,
भारत की हिंदी महान बने।

हिंदी का दीप सदा जलता रहे,
मन में इसका सम्मान रहे।
मातृभूमि के गौरव के संग,
हिंदी का नित उत्थान रहे।

हिंदी दिवस, 2026 की शुभकामनाएं।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.