भारत के साथ नए रिश्ते बनाना चाहता है बांग्लादेश
बांग्लादेशी विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर का बड़ा बयान, कहा- भारत महज एक और पड़ोसी देश है, पुराने आकर्षण से आगे बढ़ना होगा।
- बांग्लादेश के विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने भारत के साथ संबंधों को लेकर एक नया और बड़ा बयान दिया है।
- उन्होंने पिछले 15 वर्षों के रिश्तों को असहज बताते हुए कहा कि ढाका अब पुरानी प्राथमिकताओं से आगे बढ़कर नए सिरे से द्विपक्षीय संबंध बनाना चाहता है।
- सीमा विवादों और समझौतों की समीक्षा को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार इन मुद्दों को राजनयिक माध्यमों और बातचीत से सुलझाएगी।
समग्र समाचार सेवा
ढाका / नई दिल्ली, 14 सितंबर: भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक संबंधों को लेकर एक बार फिर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। बांग्लादेश के विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भारत के साथ द्विपक्षीय रिश्तों को लेकर बेहद बेबाक टिप्पणियां की हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 15 वर्षों के दौरान दोनों देशों के रिश्ते काफी असहज रहे हैं और अब समय आ गया है कि ढाका पुराने राजनीतिक समीकरणों व अत्यधिक जुड़ाव के आकर्षण से बाहर निकले। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में यह भी कहा कि भारत क्षेत्र का एक अन्य देश है और बांग्लादेश उसके साथ गरिमापूर्ण, संतुलित तथा स्वतंत्र रूप से द्विपक्षीय संबंध मजबूत करना चाहता है।
सीधी बातचीत और बहुपक्षीय मंचों पर स्थिति
राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यदि दोनों देशों के बीच किसी भी प्रकार के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होनी है, तो वह किसी अंतरराष्ट्रीय या बहुपक्षीय सम्मेलन के इतर (साइडलाइन में) नहीं, बल्कि औपचारिक और सीधी द्विपक्षीय यात्राओं के माध्यम से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय स्थिरता और आपसी विश्वास को बढ़ाने के लिए दोनों सरकारों को बिना किसी तीसरे पक्ष के प्रभाव के सीधे संवाद करना चाहिए। हाल ही में संपन्न हुए ब्रिक्स सम्मेलन और वैश्विक कूटनीति के परिप्रेक्ष्य में उनके इस बयान को कूटनीतिक गलियारों में काफी अहम माना जा रहा है।
सीमा विवाद और समझौता ज्ञाپनों (MoU) की समीक्षा
भारत-बांग्लादेश सीमा पर सामने आने वाली हालिया घटनाओं और तनाव के बारे में पूछे जाने पर कबीर ने आश्वासन दिया कि इन तमाम मसलों को कूटनीतिक और राजनयिक माध्यमों से ही सुलझाया जाएगा। दोनों देशों के बीच अंतरराष्ट्रीय कानूनों और तय सीमा प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन किया जाएगा। इसके अलावा, पूर्व में हुए विभिन्न समझौता ज्ञापनों (MoUs) की संसदीय प्रक्रिया के तहत की जा रही समीक्षा पर उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि प्रत्येक समझौता देश के मौजूदा राष्ट्रीय हितों और प्राथमिकताओं के पूरी तरह अनुकूल हो।
क्षेत्रीय सहयोग और भविष्य की रणनीतियां
दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए भारत और बांग्लादेश का आपसी तालमेल हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है। हालांकि, हालिया राजनीतिक बदलावों के बाद बांग्लादेशी हुक्मरानों के तेवर और विदेश नीति में आए बदलाव साफ तौर पर देखे जा सकते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक हित गहराई से जुड़े हुए हैं, इसलिए किसी भी प्रकार के गतिरोध को बातचीत के जरिए ही दूर किया जा सकता है। आने वाले समय में दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच होने वाली बैठकों से यह स्पष्ट होगा कि भविष्य में द्विपक्षीय सहयोग का स्वरूप क्या होगा।
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