सांस्कृतिक समागम विशेषांक का भव्य विमोचन

वनवासी कल्याण आश्रम दिल्ली और वनबंधु मीडिया फाउंडेशन की संयुक्त पहल, IGNCA में आयोजित गरिमामयी कार्यक्रम में दिग्गजों की रही उपस्थिति।

  • नई दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में ‘सांस्कृतिक समागम विशेषांक’ का भव्य विमोचन संपन्न हुआ।
  • कार्यक्रम में मुख्य वक्ता भगवान सहाय ने कहा कि एकरस और समरस समाज से ही देश का विकास संभव है।
  • केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गा दास उइके ने जनजाति समाज के लिए इस विशेषांक को एक प्रेरणादायी ग्रंथ बताया।

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 20 सितंबर: राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA), जनपथ बिल्डिंग में वनवासी कल्याण आश्रम दिल्ली एवं वनबंधु मीडिया फाउंडेशन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित ‘सांस्कृतिक समागम विशेषांक’ के विमोचन समारोह का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में देश भर से आए कई प्रतिष्ठित विद्वानों, विचारकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य-सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने की, जबकि केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के राज्य मंत्री दुर्गा दास उइके विशिष्ट अतिथि के रूप में और वनवासी कल्याण आश्रम के अखिल भारतीय सह संगठन मंत्री भगवान सहाय मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर मंच पर वनवासी कल्याण आश्रम दिल्ली के अध्यक्ष सुशील बाहेती भी सुशोभित रहे।

समरस और एकरस समाज के निर्माण पर जोर

कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक रूप से दीप प्रज्वलन और प्रेरणादायक एकल गीत के साथ किया गया। अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने पिछले दिनों आयोजित जनजाति समागम का जिक्र करते हुए कहा कि उसकी गूंज केवल भारत ही नहीं बल्कि विदेशों तक सुनाई दी थी। लाखों अनुशासित लोगों की उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि बिना किसी व्यवधान के भी इतने बड़े आयोजनों को कितनी सफलता से संपन्न किया जा सकता है। मुख्य वक्ता भगवान सहाय ने अपने संबोधन में कहा कि देश को सुखमय और सम्मानजनक जीवन जीने के लिए समाज का एकरस और समरस होना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि हमारे वन क्षेत्र ही प्राचीन काल से शिक्षा और ज्ञान के केंद्र रहे हैं, और जागृत वनवासी समाज से ही एक समर्थ भारत का निर्माण संभव है।

जनजाति समाज का गौरवशाली इतिहास और योगदान

भगवान सहाय ने आगे कहा कि लंबे संघर्ष के कालखंड के कारण आज हमारा वनवासी समाज आत्म-विस्मृति का शिकार हो गया है, जिन्हें जागृत करना हम सबका मुख्य लक्ष्य होना चाहिए। वेद, वनवासी समाज की ही महान देन हैं। भगवान श्रीराम ने इन्हीं की भुजाओं के बल पर अधर्म का नाश किया था और महाभारत के युद्ध में भी उनके पूर्वजों की बड़ी भूमिका रही थी। महाराणा प्रताप और शिवाजी महाराज के पक्ष में संघर्ष करने तथा देश के स्वाधीनता संग्राम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वाला यही समाज था। विशिष्ट अतिथि दुर्गा दास उइके ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह विशेषांक हमारे जनजाति समाज के लिए एक प्रेरणादायी ग्रंथ के रूप में कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि जनजाति समाज को हम केवल बाहरी दृष्टिकोण से नहीं समझ सकते, इसके लिए उनके भीतर उतरना होगा।

प्रमुख गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति

कार्यक्रम के अंत में सुशील बाहेती ने सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया। इस गरिमामयी अवसर पर वनवासी कल्याण आश्रम के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख प्रमोद पेठकर, प्रशासनिक कार्य प्रमुख सुरेश कुलकर्णी, सह प्रशासनिक कार्य प्रमुख प्रवीण, विश्व हिंदू परिषद से कपिल खन्ना, संघ के यमुना विहार विभाग के संघचालक अरुण शर्मा, प्रांत सेवा प्रमुख रविकांत, क्षेत्रीय संगठन मंत्री धनीराम, प्रांत उपाध्यक्ष रघुनंदन शर्मा, संगठन मंत्री आनंद, प्रांत कोषाध्यक्ष भीम बंसल, अजीत शुक्ला और सीमा ओझा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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