3एवं 4अक्टूबर को होनेवाले युवा इतिहासकारों के शोध लेखन,शोध प्रारूप एवं कार्ययोजना पर एक बैठक -सह कार्यशाला का आयोजन अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के केंद्रीय कार्यालय के “सभागार “में सम्पन्न हुआ।
इस कार्यशाला के मुख्य अतिथि एवं मार्गदर्शक डॉ.बालमुकुंद पांडे जी रहे।उनका कहना हैं कि युवा इतिहासकारों एवं युवा समाज वैज्ञानिकों का इतिहास के पुनर्लेखन एवं नया आयाम देने में महत्वपूर्ण भूमिका है। युवाओं के योगदान से भारत “उच्च आय वाली अर्थव्यवस्था” के रूप में विकसित हों रहा है। उन्होंने सम्मेलन में सहभागियों की संख्या एवं अब तक प्रगति की जानकारी ली। प्राप्त जानकारी के अनुसार सम्मेलन में लगभग 500 सहभागियों के सम्मिलित होने की संभावना है।
डॉ पांडे जी ने सभी सदस्यों के उत्साह और ऊर्जावान प्रयासों की सराहना करते हुए शोध- पत्रों के लेखन को प्रोत्साहित करने तथा युवा इतिहासकारों को उचित मार्गदर्शन करने पर बल दिए। उन्होंने सम्मेलन को सफल बनाने के लिए सभी सदस्यों को सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किए एवं साथ ही सम्मेलन की सफलता के लिए सभी कार्यकर्ताओं से समन्वय एवं सहयोग की भावना के लिए एक साथ एकजुट होकर कार्य करने का आवाहन किए।
डॉ बालमुकुंद पांडे जी ने बैठक -सह कार्यशाला में उपस्थित सभी पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं को इतिहास लेखन तथा संगठनात्मक दायित्वों के प्रति समर्पित भाव से कार्य करने के लिए प्रेरित किया एवं इस अवसर पर इतिहास -लेखन से संबंधित प्रशांत जैन द्वारा लिखित पुस्तक के विमोचन का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है। डॉ.पांडे जी ने बैठक की कार्यवाही के विभिन्न पक्षों का सूक्ष्मता एवं अतिगंभीरता से अवलोकन और परीक्षण किया एवं कार्यक्रम से संबंधित सभी विषयों पर विस्तार पूर्वक मार्गदर्शन दिए । उन्होंने कार्यकर्ताओं को प्रत्येक दायित्व का सुव्यवस्थित एवं प्रभावी ढंग से निर्वहन करते हुए इतिहास -लेखन के क्षेत्र में निरंतर सक्रियता एवं गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रेरित किए।
डॉ. पांडे जी ने सूचनाओं के त्वरित एवं प्रभावी आदान-प्रदान के लिए युवा इतिहासकारों का “व्हाट्सएप ग्रुप” के गठन के निर्देश दिए । उन्होंने सहभागियों की सुविधा एवं सुगम आवागमन को ध्यान रखते हुए यातायात की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं हों,इसके लिए आवश्यक दिशा -निर्देश प्रदान किया। स्मारिका के प्रकाशन एवं उससे संबंधित कार्यों की प्रगति के संबंध में भी उन्होंने आवश्यक मार्गदर्शन दिए।
उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं के भीतर उत्साह,कार्य करने का जुनून और चुनौतियों का सामना करने का अदम्य साहस और अपार ऊर्जा होती है, उनमें कठिन परिश्रम करने की अपार क्षमता ,अपने सपनों को साकार करने का दृढ़ मनोबल होता है। युवाओं की व्यक्तिगत सफलता न केवल उनके जीवन को नई दिशा देती है, बल्कि उनकी उपलब्धियां राष्ट्र की प्रगति और सफलता में भी महत्वपूर्ण योगदान करती हैं। भारत ने वर्ष 2047 तक देश को “विकसित राष्ट्र” बनाने का संकल्प लिया है। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य की प्राप्ति में युवाओं की भूमिका सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। वर्तमान समय में भारत विश्व की तेजी से उभरते अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और देश में आधारभूत संरचना, प्रौद्योगिकी, शिक्षा ,नवाचार तथा रोजगार के क्षेत्र में विकास की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।
विकसित भारत का निर्माण केवल आर्थिक उपलब्धियों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए ऐसे जागरूक नागरिकों की आवश्यकता है जो संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों को अपने व्यवहार में उतारें। आज के युवाओं को अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों के प्रति भी सजग होना होगा। सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, महिला सम्मान, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति विश्वास जैसे मूल्यों का पालन विकसित भारत की आधारशिला को और अधिक सुदृढ़ बनाता है।
बैठक सह कार्यशाला को धन्यवाद एवं आभार डॉ.रत्नेश कुमार त्रिपाठी,राष्ट्रीय मंत्री ने दिए। उन्होंने कहा कि युवा इतिहासकारों से इतिहास के पुनर्लेखन के लिए मानविकी एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपनाने की आवश्यकता है। उनका कहना है कि समय की आवश्यकता को देखते हुए युवाओं को विवेकीय प्रज्ञा से कार्य करने की आवश्यकता है।
कार्यशाला सह बैठक को डॉ.नरेंद्र शुक्ला जी,अखिल भारतीय लेखक परिषद के सदस्य ने आगामी युवा इतिहासकार सम्मेलन के लिए ऊर्जावान स्तर पर कार्य करने के लिए सभी को प्रोत्साहित किए।उन्होंने कहा कि हम सभी को हृदय से युवा इतिहासकार सम्मेलन की सफल बनाने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास करने की आवश्यकता है।उन्होंने सम्मेलन में युवाओं की अधिकतम भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किए।
बैठक सह कार्यशाला को दिल्ली प्रांत के महासचिव डॉ.निर्मल पाण्डेय जी संबोधित किए।उन्होंने सबको कार्य करने के लिए प्रेरित एवं आत्मीयता प्रकट किए।सभी को तत्परता से शोध सारांश एवं अपने आगमन एवं प्रस्थान हेतु त्वरित स्तर पर मन को मजबूत बनाने के लिए प्रेरित किए।
बैठक सह कार्यशाला की अध्यक्षता प्रोफेसर (डॉ )धर्मचंद चौबे जी ने किए।उन्होंने बैठक में उपस्थित एवं आए सभी को हृदय तल से आभार एवं धन्यवाद दिए।उन्होंने शोध पत्र लेखन के लिए सबको प्रोत्साहित किए।उन्होंने कहा कि शोध पत्र लेखन में समस्याओं को निराकरण वे हर समय उपस्थित रहेंगे।
बैठक सह कार्यशाला में डॉ.सुधाकर कुमार मिश्रा, श्री मुकेश उपाध्यायजी, डॉ.सचिन रतन झा, डॉ.पीयूष मिश्रा, डॉ. अस्मित शर्मा, डॉ.बमबम जी, डॉ.रमाकांत दुबे , डॉ.सत्यप्रकाश , डॉ प्रदीप कुमार उपाध्याय जी, डॉ अजय कुमार सिंह, डॉ विवेक जी, डॉ शैलेश जी एवं डॉ रमाकांत दुबे जी की गरिमामई उपस्थिति रही।
कार्यक्रमोंपरांत स्वादिष्ट जलपान की व्यवस्था श्री जितेंद्र जी एवं उनके सहयोगी ने करवाए।
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