दिल्ली-NCR में यौन अपराधों पर सुप्रीम कोर्ट का स्वतः संज्ञान, लचर गश्त पर जताई चिंता

समग्र समाचार सेवा

नई दिल्ली 28 दिल्ली-NCR में हाल के दिनों में सामने आए यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म के मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। शीर्ष अदालत ने सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए पुलिस गश्त और प्रशासनिक व्यवस्था में संभावित खामियों को रेखांकित किया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि “लचर गश्त और अन्य रोकी जा सकने वाली प्रशासनिक कमियों” के कारण सार्वजनिक स्थानों को “अत्यधिक जोखिम वाले क्षेत्र” बनने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत की यह टिप्पणी सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन की जिम्मेदारी पर केंद्रित रही।

शीर्ष अदालत का यह कदम दिल्ली-NCR में हाल में सामने आए यौन अपराधों की घटनाओं के संदर्भ में आया है। अदालत ने मामले को स्वतः संज्ञान में लेते हुए यह संकेत दिया कि सार्वजनिक स्थानों पर अपराध की रोकथाम के लिए प्रभावी निगरानी और पुलिस गश्त आवश्यक है।

अदालत के समक्ष यह मुद्दा भी महत्वपूर्ण होगा कि संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले इलाकों में पुलिस की मौजूदगी कितनी प्रभावी है तथा अपराध की आशंका वाले क्षेत्रों की पहचान और निगरानी के लिए क्या व्यवस्था लागू है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि नागरिकों को सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा का भरोसा मिलना चाहिए। अदालत के अनुसार, ऐसी प्रशासनिक कमियां जिन्हें समय रहते रोका जा सकता है, उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

स्वतः संज्ञान का अर्थ है कि अदालत ने किसी निजी याचिका के आधार पर नहीं, बल्कि सामने आए मामलों और परिस्थितियों को देखते हुए स्वयं मामले को न्यायिक जांच के लिए लिया है। अब सुनवाई के दौरान संबंधित अधिकारियों से सुरक्षा व्यवस्था, पुलिस गश्त और अपराध रोकने के लिए उठाए गए कदमों के संबंध में जानकारी ली जा सकती है।

इस मामले में आगे की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की ओर से सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा और पुलिस व्यवस्था को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए जाने की संभावना है। हालांकि, मामले की अंतिम दिशा अदालत की आगामी सुनवाई और उसके आदेशों पर निर्भर करेगी।

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