भारतीय सिनेमा के अनमोल रत्न नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि
अभिनय के चलते-फिरते विश्वविद्यालय थे नाना पाटेकर
डॉ. कुमार राकेश
भारतीय सिनेमा जगत ने एक ऐसा अद्वितीय सितारा खो दिया है, जिसकी अदाकारी के कायोर्ं और उनके बेबाक अंदाज की मिसालें हमेशा दी जाती रहेंगी। विश्वनाथ पाटेकर उर्फ नाना पाटेकर (Nana Patekar) अब हमारे बीच नहीं रहे। उनका जाना कला और अभिनय की दुनिया के लिए एक अपूरणीय क्षति है। पर्दे पर उनके हाव-भाव, आंखें, और संवाद अदायगी का अंदाज़ ऐसा था जिसने पुराने सभी अभिनय के मानकों को बदल कर रख दिया।
सादगी और बेबाकी की अनूठी मिसाल
नाना पाटेकर केवल परदे पर ही नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन में भी एक ज़िंदादिल और निडर इंसान थे। उनके करीबी लोग बताते हैं कि वे अंदर और बाहर से एक जैसे थे—पूरी तरह पारदर्शी और बिंदास। उन्होंने अपने जीवन के हर पल को पूरी शिद्दत के साथ जिया। फिल्म ‘अंकुश’ से हिंदी सिनेमा में अपने सफर की एक मजबूत शुरुआत करने वाले नाना पाटेकर ने ‘परिंदा’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘खामोशी’, ‘अपहरण’ और ‘अब तक छप्पन’ जैसी तमाम बेहतरीन फिल्मों में अपनी अमिट छाप छोड़ी। फिल्मों के अलावा उनका जुड़ाव भारतीय सेना और सामाजिक सरोकारों से भी गहरा रहा, जो उनके संवेदनशील व्यक्तित्व को दर्शाता है।
कला जगत में शोक की लहर
उनके निधन से पूरे देश और फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। फैंस और तमाम फिल्मी हस्तियों ने उन्हें नम आंखों से याद किया है। कला और मानवता के इस अद्भुत संगम को शत-शत नमन! ईश्वर उनकी दिवंगत आत्मा को शांति और अपने श्रीचरणों में स्थान दे।
ओम शांति!
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