गुजरात के भरूच में रासायनिक संयंत्र में विस्फोट, पांच लोगों की मौत

  • गुजरात के भरूच में सिनजील फार्माकेम के रासायनिक संयंत्र में रिएक्टर विस्फोट की खबर।
  • हादसे में पांच लोगों की मौत की सूचना, औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल।
  • रासायनिक संयंत्रों में सुरक्षा ऑडिट और आपातकालीन तैयारियों की आवश्यकता फिर उजागर।
  • दुर्घटना के कारणों और सुरक्षा मानकों के अनुपालन की जांच महत्त्वपूर्ण।

 

समग्र समाचार सेवा 

भरूच, गुजरात 17 अक्टूबर: गुजरात के प्रमुख औद्योगिक जिले भरूच में स्थित सिनजील फार्माकेम के रासायनिक संयंत्र में रिएक्टर विस्फोट की घटना में पांच लोगों की मौत की खबर सामने आई है। इस दुर्घटना ने रासायनिक उद्योगों में काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा और औद्योगिक प्रतिष्ठानों में अपनाए जा रहे सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।

भरूच गुजरात के प्रमुख रासायनिक एवं औद्योगिक केंद्रों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में रासायनिक और औषधि निर्माण से संबंधित इकाइयां संचालित होती हैं। ऐसे उद्योगों में उच्च तापमान, दबाव और खतरनाक रसायनों के साथ काम करने के कारण विशेष सुरक्षा प्रबंध आवश्यक होते हैं।

रिएक्टर विस्फोट के कारणों की जांच जरूरी

रासायनिक संयंत्रों में रिएक्टर का उपयोग विभिन्न पदार्थों के बीच नियंत्रित रासायनिक प्रतिक्रियाएं कराने के लिए किया जाता है। तापमान, दबाव या रासायनिक प्रतिक्रिया पर नियंत्रण में गंभीर गड़बड़ी होने से विस्फोट जैसी दुर्घटनाएं हो सकती हैं।

हालांकि भरूच की इस घटना में विस्फोट का वास्तविक कारण क्या था, यह तकनीकी जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा। बिना जांच के किसी उपकरण की खराबी, कर्मचारियों की गलती अथवा प्रबंधन की लापरवाही को दुर्घटना का कारण मानना उचित नहीं होगा।

15 हजार लीटर क्षमता वाला रिएक्टर फटा, छह घायल

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार देर रात वागरा तालुका के सायखा जीआईडीसी औद्योगिक क्षेत्र में स्थित सिनजील फार्माकेम कंपनी में हाइड्रोजिनेशन प्रक्रिया चल रही थी। इसी दौरान 15 हजार लीटर क्षमता वाले रिएक्टर में भीषण विस्फोट हो गया।

औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी दिनेश गामित के अनुसार, दुर्घटना में पांच मजदूरों की मौत हुई और छह अन्य घायल हुए। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि उसकी आवाज लगभग 15 किलोमीटर दूर तक सुनाई देने की खबर है। धमाके से संयंत्र की मशीनरी और लोहे के हिस्से दूर तक बिखर गए।

गैस रिसाव से आसपास के क्षेत्र में दहशत

विस्फोट के बाद मिथिलीन डाइक्लोराइड (MDC) गैस के रिसाव की खबर सामने आई। संयंत्र परिसर और आसपास धुंध जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। कुछ लोगों ने आंखों में जलन की शिकायत भी की।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और आपातकालीन सेवाओं की टीमें मौके पर पहुंचीं। मृतकों के शव भरूच सिविल अस्पताल भेजे गए, जबकि घायलों को भरूच और वडोदरा के अस्पतालों में भर्ती कराया गया।

औद्योगिक सुरक्षा विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शुरू की जांच

गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (GPCB) और औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने घटनास्थल पर जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि हाइड्रोजिनेशन प्रक्रिया के दौरान विस्फोट किस कारण हुआ और संयंत्र में निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं।

इस हादसे ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि अत्यधिक जोखिम वाले रासायनिक उद्योगों में कर्मचारियों की सुरक्षा, नियमित तकनीकी निरीक्षण और आपातकालीन बचाव व्यवस्थाओं को कितनी प्रभावी तरीके से लागू किया जा रहा है।

औद्योगिक विकास के साथ श्रमिकों के जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। दुर्घटना के वास्तविक कारण और संभावित जिम्मेदारी का निर्धारण जांच पूरी होने के बाद ही किया जा सकेगा

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