अमित शाह ने नारायण गुरु और अय्यंकाली को दी श्रद्धांजलि
केंद्रीय गृह मंत्री ने महान समाज सुधारकों के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके आदर्श देश को सामाजिक न्याय की राह दिखाते हैं।
- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने महान समाज सुधारक श्री नारायण गुरु और अय्यंकाली को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
- उन्होंने कहा कि इन महापुरुषों ने समाज में व्याप्त छुआछूत और असमानता के खिलाफ कड़ा संघर्ष कर समतामूलक समाज की नींव रखी।
- उनके विचार और आदर्श आज भी देशवासियों को समानता, न्याय और सामाजिक सद्भाव के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।
नई दिल्ली, 28 अगस्त: भारत की भूमि हमेशा से ऐसे महान संतों, विचारकों और समाज सुधारकों की जन्मस्थली रही है जिन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों, भेदभाव और असमानता के खिलाफ आजीवन कड़ा संघर्ष किया। Global Governance News की रिपोर्ट के अनुसार, देश के केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने महान समाज सुधारक श्री नारायण गुरु (Sri Narayana Guru) और महात्मन अय्यंकाली (Ayyankali) की जयंती के अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। गृह मंत्री ने सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों के जरिए उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि इन दूरदर्शी विभूतियों ने भारतीय समाज की तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभाई है।
श्री नारायण गुरु: एकता और समता के अग्रदूत
श्री नारायण गुरु का जीवन और दर्शन केवल केरल तक ही सीमित नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणास्त्रोत रहा है। उन्होंने ‘एक जाति, एक धर्म, एक ईश्वर मनुष्य के लिए’ का प्रसिद्ध संदेश देकर समाज में जातिगत भेदभाव की दीवारों को गिराने का काम किया। गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संदेश में कहा कि श्री नारायण गुरु ने समाज के शोषित और वंचित वर्ग को शिक्षा, आत्मसम्मान और आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने का ऐतिहासिक कार्य किया। उनके विचारों ने भारतीय समाज को एक नई दिशा दी, जिससे सदियों से उपेक्षित रहे वर्गों को समाज की मुख्यधारा में आने का अवसर मिला।
महात्मा अय्यंकाली का सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष
दक्षिण भारत में सामाजिक न्याय और समानता के एक अन्य महान योद्धा महात्मा अय्यंकाली ने अछूत माने जाने वाले वर्गों के अधिकारों के लिए अभूतपूर्व लड़ाई लड़ी। उन्होंने शिक्षा के अधिकार, स्वतंत्रता और मानवीय गरिमा के लिए कड़ा संघर्ष किया। गृह मंत्री ने अय्यंकाली के साहसिक कदमों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने पिछड़ों और दलितों के उत्थान के लिए जो नींव रखी, उसने आधुनिक समाज में समानता के मार्ग को प्रशस्त किया। उनके संघर्षों के परिणामस्वरूपी समाज में एक नई जागृति आई, जिसने रूढ़िवादिता और असमानता की जंजीरों को कमजोर किया।
आज के दौर में महापुरुषों के विचारों की प्रासंगिकता
आज के समय में जब देश आधुनिकता और विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है, तब इन महापुरुषों के विचार और अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। सामाजिक समरसता, सबका साथ-सबका विकास और समावेशी समाज के निर्माण का जो सपना इन सुधारकों ने देखा था, आज सरकारें और समाज मिलकर उसे पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। अमित शाह ने इस बात पर जोर दिया कि नई पीढ़ी को इन महान विभूतियों के जीवन संघर्षों से प्रेरणा लेनी चाहिए, ताकि हम एक ऐसे भारत का निर्माण कर सकें जहाँ जाति, वर्ग या लिंग के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो।
राष्ट्र निर्माण में योगदान और श्रद्धांजलि का संदेश
देश के गृह मंत्री द्वारा इन महान समाज सुधारकों को नमन करना यह दर्शाता है कि केंद्र सरकार देश की सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत को सहेजने के प्रति कितनी कटिबद्ध है। श्री नारायण गुरु और अय्यंकाली जैसे महापुरुषों के बलिदान और विचारों के कारण ही आज भारतीय समाज में लोकतंत्र और समानता की जड़ें इतनी मजबूत हो पाई हैं। इस विशेष अवसर पर देश भर के विभिन्न हिस्सों में संगोष्ठियों और कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें उनके जीवन दर्शन पर विस्तार से चर्चा की गई।
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