अनंत सिंह को सुप्रीम कोर्ट से झटका, सरेंडर का आदेश
दुलारचंद यादव हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की अनंत सिंह की जमानत, 1 दिसंबर 2026 तक सरेंडर करने का कड़ा निर्देश।
- सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की बाहुबली अनंत सिंह की जमानत।
- 1 दिसंबर 2026 तक कोर्ट में सरेंडर करने का दिया आदेश।
- दुलारचंद यादव हत्याकांड मामले में शीर्ष अदालत का बड़ा फैसला।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 30 अक्तूबर: बिहार के बाहुबली नेता और मोकामा के मोकामा विधायक अनंत सिंह (Anant Singh) की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बेहद बढ़ गई हैं। देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को एक बड़ा और कड़ा फैसला सुनाते हुए बहुचर्चित दुलारचंद यादव हत्याकांड (Dularchand Yadav Murder Case) में अनंत सिंह को मिली जमानत को पूरी तरह रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति एम. एम. सुंद्रेश और न्यायमूर्ति पी. वी. वराले की पीठ ने पटना उच्च न्यायालय के फैसले को खारिज करते हुए अनंत सिंह को 1 दिसंबर 2026 तक या उससे पहले संबंधित अधिकारियों और अदालत के समक्ष सरेंडर करने का आदेश दिया है।
जेडीयू (JDU) से निष्कासित चल रहे पूर्व विधायक अनंत सिंह के लिए यह फैसला राजनीतिक और कानूनी दोनों ही मोर्चों पर एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है।
पटना हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने बताया गलत
सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट टिप्पणी की कि पटना हाई कोर्ट ने मार्च 2026 में अनंत सिंह को जमानत देकर भारी भूल की थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि हाई कोर्ट ने जमानत याचिका पर विचार करते समय इस जघन्य अपराध की गंभीर प्रकृति और अनंत सिंह के लंबे आपराधिक इतिहास (Criminal Antecedents) को नजरअंदाज कर दिया था।
अदालत ने कहा कि आरोपी के खिलाफ दर्ज दर्जनों आपराधिक मुकदमों और इस मामले के तथ्यों को देखते हुए उसे जमानत पर बाहर रखना न्यायसंगत नहीं है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच कर रही एजेंसी और बिहार पुलिस को निर्देश दिया है कि दुलारचंद यादव हत्याकांड की बची हुई जांच को अगले चार महीनों के भीतर हर हाल में पूरा किया जाए।
क्या था दुलारचंद यादव हत्याकांड?
यह पूरा मामला वर्ष 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान का है। उस वक्त मोकामा क्षेत्र में चुनाव प्रचार के दौरान राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में दुलारचंद यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में मृतक के परिजनों द्वारा घोसवारी थाने में दर्ज कराई गई प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि अनंत सिंह और उनके सहयोगियों ने दुलारचंद यादव के साथ मारपीट की और उसके बाद गोली मार दी, जिससे उनकी मौत हो गई थी।
घटना के तुरंत बाद 1 नवंबर 2025 को पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अनंत सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। हालांकि, जेल में रहते हुए ही उन्होंने चुनाव लड़ा और जीत हासिल की थी। इसके बाद मार्च 2026 में पटना हाई कोर्ट से उन्हें जमानत मिल गई थी, जिसे बाद में पीड़ित पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
जेडीयू से निष्कासन के बाद बैकफुट पर अनंत सिंह
उल्लेखनीय है कि अनंत सिंह हाल के दिनों में लगातार राजनीतिक विवादों में घिरे रहे हैं। हाल ही में संपन्न हुए बिहार विधान परिषद (MLC) चुनाव के दौरान उन्होंने पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर जेडीयू प्रत्याशी नीरज कुमार के खिलाफ काम किया था। इसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर जेडीयू ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था।
पार्टी से निकाले जाने और विधान परिषद चुनाव में उनके समर्थित उम्मीदवार की हार के बाद अब सुप्रीम कोर्ट से जमानत रद्द होने का यह फैसला अनंत सिंह के राजनीतिक भविष्य को गहरे संकट में डालता नजर आ रहा है।
निष्कर्ष
सर्वोच्च न्यायालय के इस कड़े रुख से यह साफ हो गया है कि जघन्य मामलों और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं के प्रति अदालतें किसी प्रकार की ढील देने के मूड में नहीं हैं। 1 दिसंबर तक सरेंडर करने की समयसीमा तय होने के बाद अब बिहार पुलिस और स्थानीय प्रशासन सरेंडर की कानूनी प्रक्रिया की तैयारी में जुट गया है।
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