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जीजीएन विशेष

भाजपा फिर बहुमत की तरफ, शिवराज सबसे जनप्रिय नेता

नितिनमोहन शर्मा। जगत मामा यानी शिवराज भैय्या ही मध्यप्रदेश भाजपा के इकलौते खेवनहार साबित हो रहें हैं। उन्ही के दम पर भाजपा मध्यप्रदेश की सत्ता के एक बार फिर लौट रही हैं। वह भी पूर्ण बहुमत के साथ। 140 सीट के आसपास तक। 18 साल की सत्ता के बाद…

बाघा जतिन ……जो कर देते थे अंग्रेजी की पिटाई….

पवन कुमार सरजी एक ऐसा क्रांतिकारी भी था,जिसका प्लान अगर कामयाब हुआ होता, साथी ने गद्दारी नहीं की होती तो देश 32 साल पहले ही यानी 1915 में स्वतंत्र हो गया होता। जब भय में लोग घरों में भी सहम कर रहते थे, वो अकेला जहां अंग्रेजों को देखता,…

उद्योगपतियों के परम मित्र मोदी जी ने अबकी मीडिया उद्यमी सुभाष चंद्रा का हज़ारों करोड़ रुपये माफ़ कर…

सुने हैं कि जी मीडिया समूह का करोडों रुपये का लोन माफ कर दिया गया..? किसी कंपनी को दिए गए बैंक लोन में कंपनी के मालिकों की पर्सनल गारंटी भी होती है…

मोहब्बत बनाम नफरत का अक्स

-बलबीर पुंज कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी की 'मोहब्बत की दुकान' से बेचे जाने वाले वस्तुओं के नमूने उपलब्ध होना आरंभ हो गए है। चेन्नई में 2 सितंबर को एक कार्यक्रम में बोलते हुए उदयनिधि स्टालिन ने कहा, "कुछ चीजें हैं, जिनका हमें…

कोरे कागज पर रंग भरतीं स्त्रियां

*संजय स्वतंत्र भारतीय स्त्रियों ने सदियों से पीड़ा झेली है। उनके संघर्ष की अनंत गाथा है। पुरुषों की आधी दुनिया है वह। फिर भी वह हाशिए पर है, तो इसके लिए जिम्मेदार पुरुष है। पितृसत्ता ने स्त्रियों के जीवन को कोरा कागज बना दिया है। नतीजा अब…

क्या यही सनातन धर्म है ?

*शिवानन्द तिवारी किसी का सर काटने के लिए इनाम की घोषणा करना क्या सनातन धर्म है ! धार्मिक सम्मेलनों में किसी समुदाय विशेष के जनसंहार करने की अपील करना क्या सनातन धर्म का हिस्सा है. याद होगा, महाभारत काल के सनातनी गुरू द्रोणाचार्य ने गुरु…

सुहागन की बिंदी…

*पवन कुमार सरजी बाहर फेरीवाला आया हुआ था, कई तरह का सामान लेकर। बिंदिया, कांच की चूड़ियां, रबर बैंड, हेयर बैंड, कंघी, काँच और भी बहुत सारे सामान थे । आस पड़ोस की औरतें उसे घेर कर खड़ी हुई थी । काफी देर तक बाबा गेट पर अपनी लाठी टेककर…

मिर्च-मसाला- संसद के विशेष सत्र का छुपा एजेंडा क्या है?

त्रिदीब रमण ’उतनी बारूद अपने अंदर बचा कर रखना जितनी रखती हैं माचिस की तिल्लियां अंधेरों को मालूम हो तेरे जलने का हुनर’ शह-मात की सियासी बिसात पर आप इसे केंद्र नीत भाजपा सरकार का एक बेहद सुविचारित दांव मान सकते हैं, अब यह महज़ इत्तफाक…

राष्ट्रप्रथम- ग़लत फहमी के नैरेटिव की पाठशाला

पार्थसारथि थपलियाल पापी पेट क्या नही करवाता इसका प्रबल उदाहरण है पत्रकारिता। 30-35 साल पहले झूठ का सच गड़ने वाले न समाचार पत्र हुआ करते थे न रेडियो या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया। आकाशवाणी विवादित विषयों की बजाय सामाजिक उत्थान, विकासात्मक और…

सार्वजनिक जीवन के वैचारिक बौने लोग

पार्थसारथि थपलियाल भारत में मर्यादाओं की रक्षा समाज स्वयं करता आया है। लोक संस्कार, लोक व्यवहार, लोक अभिव्यक्ति और प्रदर्शन को लोक-मर्यादा और लोक-लाज नियंत्रित करते रहे। मर्यादाविहीन आचरण करने वाले स्वयं ही खलनायक बन जाते हैं। लोक…