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संस्कृति- राष्ट्रीय संगोष्ठी – भारत की एकात्मता और जन जातीय संस्कृति (8)

सभ्यता अध्ययन केंद्र, जन जातीयकार्य मंत्रालय, भारत सरकार और वनवासी कल्याण आश्रम के संयुक्त आयोजन दो दिवसीय संगोष्ठी के दूसरे दिन 7 अगस्त 2022 को संगोष्ठी की मुख्य अतिथि थी जन जातीयकार्य राज्यमंत्री श्रीमती रेणुका सिंह सरुता। मंच पर विराजमान…

 संस्कृति- राष्ट्रीय संगोष्ठी – भारत की एकात्मता और जन जातीय संस्कृति (7)

दूसरे दिन 7 अगस्त को कार्यक्रम के औपचारिक शुरुआत से पहले स्टेज पर रेखा बहन आदिवासी परंपरा के कुछ भजन सुना रही थी। वे अपनी प्रस्तुति से पहले भजन का भाव भी बता रही थी। जैसे-ब्याह कारिज में सबसे पहले गणपति को आमंत्रित किया जाता है।

विलक्षण हैं भारतीय वाद्ययंत्र

सनातन हिंदू दर्शन में सृष्टि की उत्पत्ति नाद से मानी जाती है। हमारे यहां इस नाद को ब्रह्म की संज्ञा दी गयी है। भारतीय ऋषियों की मान्यता है कि समूचे विश्व ब्रह्माण्ड में अनहद नाद (ओम् की ध्वनि) सतत गूंजता रहता है। इस तथ्य को अब नासा ने भी…

बदलते भारत में ‘नकारात्मक-राजनीति’ की प्रासंगिकता

अगला लोकसभा चुनाव होने में पौने दो वर्ष का समय बचा है। कई विरोधी नेता स्वयं को अभी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विकल्प प्रस्तुत करने में व्यस्त हो गए है। ऐसा प्रतीत होता है कि इनमें से अधिकांश महत्वकांशी गैर-कांग्रेसी नेता, भाजपा से पहले…