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जीजीएन विशेष
राजधर्म- मध्यमवर्ग के लिए बेदर्द जी एस टी कौंसिल
कल न्यूज़ चैनल पर यह समाचार चौंकाने वाला था कि दूध, दही, छांछ, पनीर, गेंहू, चावल, दाल, मुरमुरे, नमक, पेंसिल, रबर, शार्पनर आदि को जी इस टी कौंसिल वस्तु एवं सेवा कर (जी एस टी) के अंदर ले आई है। अब इन उत्पादों पर 5 प्रतिशत GST लगेगा। यह…
राष्ट्रप्रथम– सौ वर्षों की कामना: भारत 2047
वेदों में कई तरह की कामनाएं पढ़ने को मिलती हैं। अथर्ववेद में इसी तरह की कुछ कामनाएं हैं।
जीवेम शरदः शतम- हे सूर्य हम सौ वर्ष तक जीवित रहें।
पश्येम शरदः शतम- हे सूर्य हम सौ वर्षों…
पंचनद : तेरा वैभव अमर रहे माँ
पार्थसारथि थपलियाल।
माननीय जे. नंदकुमार जी ने अपना उद्बोधन क्रांतिकारी तारकनाथ दास को स्मरण करते हुए किया। उन्होंने पूछा आज किस क्रांतिकारी का जन्मदिन है? उत्तर न मिलता देख, बोले आज (15 जून 1884 को) बंगाल में जन्मे क्रन्तिकारी तारकनाथ…
मध्य प्रदेश डायरी :रवीन्द्र जैन
मुख्य सूचना आयुक्त को बर्खास्त करने की मांग !
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया बोर्ड के सदस्य अजय दुबे ने मप्र के मुख्य सूचना आयुक्त एके शुक्ला के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शुक्ला के खिलाफ अनेक गंभीर आरोप लगाते…
क्या है दिल्ली में भाजपा का ’मास्टर स्ट्रोक’
त्रिदीब रमण।
’बात इतनी सी थी मगर बता नहीं पाए
गैरों के आगे तुझे गले लगा नहीं पाए
शहर में इन दिनों काफिरों की आवाज़ाही है बहुत
क्यों तुम्हें खुदा अपना बना नहीं पाए’
सवाल यह लाख टके का है कि क्या केजरीवाल की दिल्ली उनकी मुट्ठियों से…
तस्मै श्रीगुरवे नमः
आज गुरुपूर्णिमा है। सनातन संस्कृति के आदि ग्रंथों के सृजक महर्षि वेदव्यास जी का जन्मदिन है। वेदों और उपनिषदों के संकलनकर्ता, पुराणों और महाभारत के रचयिता जिन्होंने मानवता को सुसंस्कृत होने का ज्ञान दिया ऐसे गुरु को नमन है।…
शिंदे की राह क्यों आसान नहीं
’इन चुप्पियों के हाथ कैसे रंगे हैं खून से
क्षत-विक्षत शब्द पड़े हैं जो हर तरफ मौन से’
एकनाथ शिंदे के सिर अभी-अभी तो सिरमौर का ताज सजा है, गाजे-बाजों का शोर भी हर ओर गुंजायमान है, फिर भी क्या बात है कि चुप सन्नाटों की बतकहियां…
मंथन- पंचनद : दैशिक शास्त्र (12)
पार्थसारथि थपलियाल
विचार मंथन का उद्देश्य होता है हमें जो मार्ग पकड़ना है उस पर चलने से पहले हम विवेकपूर्ण चिंतन कर उस विचार को मथ लें ताकि यात्रा सुनियोजित तरीके से सफल हो। इस प्रकार का मंथन इस सत्र में हुआ। अगला सत्र दैशिक शास्त्र पर…
मंथन- पंचनद : विमर्श का सांगोपांग मंथन (11)
पार्थसारथि थपलियाल
15 जून को जब सुबह सुबह की परिवह पवनें चलने लगी थी। (परिवह, आठ प्रकार की पवनों में से एक)। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय अतिथि गृह के पीछे मखमली दूब में स्वास्थ्य के प्रति सावधान प्रतिभागी अपने अपने आसान…
मंथन- धर्म की अवधारणा-आचार: प्रथमो धर्म:
पार्थसारथि थपलियाल
लोग अक्सर धर्म की बात तो करते हैं लेकिन धर्म को जानते नही हैं। कोई मंदिर जाने को धर्म कह देगा, कोई तिलक लगाने को धर्म कह देगा। कुछ लोग रीति रिवाज को तो कोई परंपराओं को धर्म मान लेता है। यह सब अज्ञानताएं हैं। भारतीय…