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स्तम्भ

श्री ए. बालकृष्णन जी को श्रद्धांजलि: एक कर्मयोगी का जीवन

जी. वासुदेव पचास वर्षों का घनिष्ठ संबंध हमारे प्रिय अध्यक्ष श्री ए. बालकृष्णन जी के 27 अगस्त 2026 को देहावसान के साथ समाप्त हो गया। जब मैं इन पचास वर्षों को पीछे मुड़कर देखता हूँ, तो कई स्मृतियाँ - उनमें से कई गहरी व्यक्तिगत - उमड़ पड़ती…

मनुस्मृति पर राहुल गांधी के दावे का क्या है सच ?

अमरीश मनीष शुक्ल पुणे के मंच पर खड़े होकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पूरे आत्मविश्वास से माइक संभाला और मनुस्मृति पर तीखा प्रहार करते हुए कहा—"मनुस्मृति में लिखा है कि स्त्री बाल्यावस्था में पिता के, युवावस्था में पति के और वृद्धावस्था…

आरक्षण विवाद में बेटियों को घसीटने पर क्यों भड़का आक्रोश?

कनकलता राय जबतक लड़ाई आरक्षण के समर्थन या उसके विरोध में चल रहा था तबतक यह राजनीतिक और संवैधानिक मामला था।अब यह लड़ाई बहन बेटियों पर आ गई। क्यों भाई अगर तुम मर्द हो तो मर्दों से लड़ो अगर घर की इज्ज़त पर आओगे तो रावण का हश्र क्या हुआ था…

बदलते रिश्ते और उपयोगिता का दौर: एक सामाजिक नजरिया

समग्र समाचार सेवा आज के समय में यदि गांव देहात में किसी पशुपालक की गाय या भैंस बछड़ा/पाड़ा को जन्म दे, तो वह दुखी हो जाता है। कोई पड़ोसी पूछे तो उदास भाव से सर झुका कर धीरे से कहते हैं, बछड़ा हुआ है... जबतक दूध निकालने के लिए उनकी जरूरत…

भारत विरोधी साजिश का पर्दाफाश: तुर्की-पाकिस्तान फंडिंग, ड्रोन से लेकर ‘रेजिम चेंज’ प्लान तक!

पूनम शर्मा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की ने पाकिस्तान को ड्रोन सप्लाई किए थे।यह बेहद खौफनाक है कि कैसे कुछ भारतीय एंटी-इंडिया कार्टेल का हिस्सा बन गए। अब्दुल मलिक मुजाहिद एक पाकिस्तानी हैं और तुर्की के प्रधानमंत्री के बेटे बिलाल…

यूरोप का जनसांख्यिकीय चौराहा: जब प्रवासन केवल आव्रजन का प्रश्न नहीं रह जाता

सुबोध मिश्रा यूरोप आज ऐसे जनसांख्यिकीय मोड़ पर खड़ा है, जिसे केवल आव्रजन नियंत्रण की समस्या मानकर टाला नहीं जा सकता। असली चुनौती तीन समानांतर प्रवृत्तियों के मिलन से पैदा हो रही है—लगातार जारी प्रवासन, यूरोपीय आबादी की अत्यंत निम्न…

फिर कभी न लौट पायें वो काले दिन

25 जून, 1975 को देष में लगी आपातस्थिति को आज 50 वर्ष हों गये हैं, लेकिन उन काले दिनों की याद आज भी मन मस्तिक पर वैसे ही ताज़ा है। उस दौर में श्री जय प्रकाष नारायण जी का आंदोलन अपनी चरम सीमा पर था। इसी दौरान 12 जून 1975 को इलाहाबाद…

सुरक्षा के चार मोर्चे: भारत की रक्षा चुनौतियों का विश्लेषण

भारत की सुरक्षा स्थिति कभी इससे पहले इतनी संवेदनशील और जटिल नहीं हो गई है। हमेशा पूर्व मुख्य रक्षा अध्यक्ष (CDS) जनरल बिपिन रावत ने कहा था कि भारतीय सेना दो मोर्चों पर युद्ध की तैयारी करती है। ये दो मोर्चे चीन और पाकिस्तान के साथ युद्ध के…

राष्ट्र निर्माण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका

डॉ०ममता पांडेय "महारानी विक्टोरिया के राज्याभिषेक की "हीरक जयंती" (डायमंड जुबली ) के अवसर पर नागपुर में बांटी गई मिठाइयों को फेंकने  वाले बालक की उम्र उस समय आठ साल  की थी।"बचपन में ही  इस बालक के मन में यह  प्रश्न  उठने लगा कि कैसे…