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विचार

23 नवम्बर जगदीशचंद्र बोसजी की पुण्यतिथि

कोई भी व्यक्ति ऐसे ही महान नही बन जाता है उस महानता तक पहुचने के लिए कठोर परिश्रम और एक ही विश्वास पर अडिग रहना पड़ता है | जगदीश चन्द्र बोस भी ऐसे ही व्यक्ति थे उन्होंने कभी भी किसी भी समस्या से हार नही मानी|

महानायक व खलनायक !

* कुमार राकेश विधर्मी है न ये ? महानायक पिता बाला साहेब का ये खलनायक पुत्र उद्धव, क्यों दिखा रहा ऐसे राष्ट्र विरोधी करतब? लायक़ पिता का नालायक पुत्र? हिंदू पिता का विधर्मी पुत्र! निजी स्वार्थ के कारण, अपनी राह से…

मतांतरण को ‘सेकुलर’ कवच कबतक?

-बलबीर पुंज। "जबरन मतांतरण करना न केवल मजहबी स्वतंत्रता के अधिकार का हनन है, अपितु यह देश की सुरक्षा के लिए भी खतरा हो सकता है।" यह वक्तव्य न ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का है और न ही किसी भाजपा नेता या फिर मोदी सरकार का। यह टिप्पणी 14…

तेजप्रताप की जगह डिंपल क्यों उतरीं मैदान में?

त्रिदीब रमण। ’घर-घर में आज भी चल रही राम कथा है विभीषण जिंदा है, सीता की वही पुरानी व्यथा है’ यादव परिवार की इस चिंता ने कि ‘घर का भेदी अगर लंका ढाह सकता है’ तो फिर मैनपुरी का उप चुनाव किस खेत की मूली है, इस ख्याल ने अखिलेश को सपा…

अब और नहीं, श्रद्धा……उनका श्राद्ध होगा ……

*कुमार राकेश ———————- ज़रा सोचिए - श्रद्धा कौन थी? क्यों मारी गयी? कौन ज़िम्मेदार ? मेरा मानना है , श्रद्धा की मौत के लिए , हम सब है ज़िम्मेदार , हम हिंदू , हमारा लचर , मुस्लिम परस्त क़ानून व हमारा ढुल-मूल संविधान- देखिए सब लोग…

19 नवम्बर जन्म-दिवस- खूब लड़ी मर्दानी वह तो रानी लक्ष्मीबाई थी

भारत में अंग्रेजी सत्ता के आने के साथ ही गाँव-गाँव में उनके विरुद्ध विद्रोह होने लगा; पर व्यक्तिगत या बहुत छोटे स्तर पर होने के कारण इन संघर्षों को सफलता नहीं मिली। अंग्रेजों के विरुद्ध पहला संगठित संग्राम 1857 में हुआ। इसमें जिन वीरों ने…

थैंक यु, मि. गोडसे

  डॉ. शंकर शरण नाथूराम गोडसे के नाम और उनके एक काम के अतिरिक्त लोग उन के बारे में कुछ नहीं जानते। एक लोकतांत्रिक देश में यह कुछ रहस्यमय बात है। रहस्य का आरंभ 8 नवंबर 1948 को ही हो गया था, जब गाँधीजी की हत्या के लिए चले मुकदमे में गोडसे…

शत-शत नमन 17 नवम्बर/पुण्य-तिथि, हिन्दू जागरण के सूत्रधार अशोक सिंघल जी।

श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन के दौरान जिनकी हुंकार से रामभक्तों के हृदय हर्षित हो जाते थे, वे श्री अशोक सिंहल संन्यासी भी थे और योद्धा भी; पर वे स्वयं को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एक प्रचारक ही मानते थे।

राष्ट्र-चिंतन-भाजपा के ब्राम्हणवाद से हारेगा केजरीवाल

ब्राम्हण 45, जाट 34, राजपूत 22, गुर्जर 17, पंजाबी 31 , वैश्य 21और पिछडे वर्ग को पांच टिकट, ये आकंडे भाजपा के दिल्ली नगर निगम चुनाव में घोषित उम्मीदवारों के हैं। इन आंकड़ो के देखने के बाद यह प्रतीत होता है कि भाजपा जातिवाद की मिसाइल से…