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जीजीएन विशेष
गुरुनानक देव जी का 556 वां प्रकाशोत्सव विशेष
गुरुनानक जी सिखों के प्रथम (आदि )गुरु हैं। इनके अनुयायी इन्हें नानक, नानक देव जी, बाबा नानक और नानकशाह नामों से संबोधित करते हैं। नानक अपने व्यक्तित्व में दार्शनिक, योगी, गृहस्थ, धर्मसुधारक, समाजसुधारक, कवि, देशभक्त और विश्वबंधु - सभी के…
सलाह सिंघई जी की
म भारतीयों में सोने के प्रति बहुत आकर्षण है और हमारे घरों में अनुमानतः 25000 टन से अधिक सोना है शायद इसीलिये विश्व हमें सोने की चिड़िया मानता है। भारत का मध्यमवर्गीय समाज सालाना 56 प्रतिशत सोना खरीदता है मगर यह सारा लेन-देन एक कागज के…
पूर्व में एक ही जाति रही- सनातन हिंदू, अब आगे भी वही होगी….
सम्राट शांतनु ने विवाह किया एक मछुवारे की पुत्री सत्यवती से, उनका बेटा ही राजा बने इसलिए भीष्म ने विवाह न करके आजीवन संतानहीन रहने की भीष्म प्रतिज्ञा की.* सत्यवती के बेटे बाद में क्षत्रिय बन गए, जिनके लिए भीष्म आजीवन अविवाहित रहे, क्या उनका…
🌹दान की महिमा 🌹
एक भिखारी सुबह-सुबह भीख मांगने निकला। चलते समय उसने अपनी झोली में जौ के मुट्ठी भर दाने डाल दिए, इस अंधविश्वास के कारण कि भिक्षाटन के लिए निकलते समय भिखारी अपनी झोली खाली नहीं रखते। थैली देखकर दूसरों को भी लगता है कि इसे पहले से ही किसी ने…
स्वयं को न कोसे,स्वयं पर भरोसा रखे !
*संतों की एक सभा चल रही थी...
किसी ने एक दिन एक घड़े में गंगाजल भरकर वहां रखवा दिया ताकि संत जन जब प्यास लगे तो गंगाजल पी सकें...
संतों की उस सभा के बाहर एक व्यक्ति खड़ा था. उसने गंगाजल से भरे घड़े को देखा तो उसे तरह-तरह के विचार आने…
लोकमंथन (23) लोक परम्पराओं में पर्यावरण और जल संरक्षण
24 सितंबर 2022 को एक महत्वपूर्ण सत्र भारतीय लोक परम्पराओं में पर्यावरण और जल संरक्षण पर केंद्रित था। जल सृष्टि के पंच महाभूत तत्वों में से एक है। वैसे तो धरती का 70 प्रतिशत भाग जल से ही भरा है लेकिन यह पीने योग्य नही है।
विश्वामित्र -राजर्षि से कैसे बने ब्रह्मर्षि
विश्वामित्र का महर्षि वशिष्ठ से झगड़ा था। विश्वामित्र बहुत विद्वान थे। बहुत तप उन्होंने किया। पहले महाराजा थे, फिर साधु हो गये। वशिष्ठ सदा उनको राजर्षि कहते थे।
मृत्यु और जीवन
एक नौजवान जीवन से निराश था। जंगल में एक पेड़ के नीचे बैठा रोता रहता था। एक दिन मृत्यु की देवी वहाँ से गुज़री और उससे पूछा, “तुम इतना दुखी क्यों हो?”
स्त्री शक्ति का महत्व
एक गांव में एक जमींदार था। उसके कई नौकरों में जग्गू भी था। गांव से लगी बस्ती में, बाकी मजदूरों के साथ जग्गू भी अपने पांच लड़कों के साथ रहता था। जग्गू की पत्नी बहुत पहले गुजर गई थी। एक झोंपड़े में वह बच्चों को पाल रहा था। बच्चे बड़े होते गये…