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विश्लेषण

मध्य प्रदेश डायरी: रवीन्द्र जैन

रवीन्द्र जैन भाजपा के परिवारवाद में कांग्रेस की घुसपैठ! मप्र में भाजपा ने परिवारवाद के खिलाफ जो मुहिम चलाई है कांग्रेस उसका फायदा उठाने आगे आ गई है। कांग्रेस ने अभी तक जिन तीन महापौर उम्मीदवारों के नाम तय किये, उन सभी का संबंध भाजपा…

राष्ट्रप्रथम- कश्मीर : सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है!

पार्थसारथि थपलियाल कश्मीर में जब भी कोई आतंकवादी घटना कारित होती है तो मीडिया से जानकारी मिलती है कि प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। यह कभी नही सुना कि पहले से कड़ी की गई सुरक्षा व्यवस्था को ढील कब दी गई? अगर सुरक्षा…

क्या हम हिंदी वाले खुश होना भी भूल गए हैं?

अजय बोकिल लगता है हम हिंदी वाले खुश होना भी भूल गए हैं। हिंदी कथाकार, उपन्यासकार गीतांजलि श्री के मूल हिंदी ‘रेत समाधि’ के अंग्रेजी में अनूदित उपन्यास ‘टूम ऑफ सेंड’ को मिले प्रतिष्ठित बुकर पुरस्कार की सुखद बयार भी आपसी तू- तू मैं-मैं,…

विश्‍व तंबाकू निषेध दिवस: क्या पर्यावरण को हो रहा तंबाकू से नुकसान?

समग्र समाचार सेवा नई दिल्ली, 31मई। 1988 से हर 31 मई को विश्‍व तंबाकू निषेध दिवस’ मनाया जाता है इस बार इसकी थीम है– ‘पर्यावरण की रक्षा करें, क्या है तंबाकू से पर्यावरण को नुक़सान?? इससे मिट्टी का क्षरण होता है और फसलों को नुकसान होता है।…

संस्कृति- राम तेरी गंगा मैली हो गई

पार्थसारथि थपलियाल जब से चारधाम यात्रा शुरू हुई तब से ऋषिकेश से चारधाम तक चर्चाएं ही चर्चाएं। चर्चा उनकी तो है ही जिनकी होनी चाहिए, लेकिन उनकी भी है जिनकी नही होनी चाहिए। अब भला कुत्ते के किस पुरखे का पिंडदान ब्रह्मशिला पर करना था कि…

व्यंग-विनोद-  त्वाडा कुत्ता टॉमी, साडा कुत्ता कुत्ता

पार्थसारथि थपलियाल कुत्ते की जात, कुत्ते की योनी, कुत्ते की नाक, कुत्ते की तरह भौंकना, कुत्ते की मौत, धोबी का कुत्ता घर का न घाट का, कुत्ते की वफादारी जैसी कितनी ही लोकोक्तियां और कहावतें समाज मे व्याप्त हैं। पहले कुत्ते घरों की…

राजधर्म- प्रधानमंत्री पद की कोचिंग से फिसलता उम्मीदवार

पार्थसारथि थपलियाल सच कहूँ, मुझे राहुल गांधी से व्यक्तिगत रूप से कोई परेशानी नही है। होनी भी नही चाहिए। परेशानी तब हो जब हमारा साझा खेत हो या साझी दुकान हो। या साझा काम हो। लेकिन जब से यह ज्ञान बढ़ा कि राहुल गांधी कोंग्रेस के पी एम…

चिकन सैंडविच, राहुल और हार्दिक

त्रिदीब रमण  ’अगर तू मुझसे खफ़ा न होता, तेरे अफ़सानों में जिक्र मेरा न होता तेरे आइने में कैद मेरा भी एक चेहरा था, अगर यूं टूटा न होता’ आज की दौर की सियासत ने नायक और प्रतिनायक के महीन फासले को कम कर दिया है, नायक के चारण गान की…

नीतीश भाजपा की मजबूरी क्यों हैं?

त्रिदीब रमण ’कहां तो हौसला था कि आसमां से सूरज उतार लाएंगे तेरी जुल्फों में उलझे सावन से हम भी बहार लाएंगे पर नए दौर का यह मौसम नया है दोस्त मैं तुझमें हूं पर मुझमें तू कहां है’ भाजपा 2024 के आम चुनावों के लिए अभी से कमर कस चुकी…

कांग्रेस अब और नहीं, भारत के लिए भाजपा ही एक मात्र विकल्प..!!!

*कुमार राकेश भारत और कांग्रेस कभी एक दुसरे के पूरक थे,अब नहीं है और रहेंगे भी नहीं.ये समय की मांग है.समय की सोच है.समय की जरुरत है.समय तेजी से बदल रहा है.भारत भी बहुत तेजी से बदल रहा है.कई मामलो में भारत विश्व के कई विकसित देशो से…