Browsing Category

व्यक्तित्व

23 नवम्बर जगदीशचंद्र बोसजी की पुण्यतिथि

कोई भी व्यक्ति ऐसे ही महान नही बन जाता है उस महानता तक पहुचने के लिए कठोर परिश्रम और एक ही विश्वास पर अडिग रहना पड़ता है | जगदीश चन्द्र बोस भी ऐसे ही व्यक्ति थे उन्होंने कभी भी किसी भी समस्या से हार नही मानी|

महानायक व खलनायक !

* कुमार राकेश विधर्मी है न ये ? महानायक पिता बाला साहेब का ये खलनायक पुत्र उद्धव, क्यों दिखा रहा ऐसे राष्ट्र विरोधी करतब? लायक़ पिता का नालायक पुत्र? हिंदू पिता का विधर्मी पुत्र! निजी स्वार्थ के कारण, अपनी राह से…

19 नवम्बर जन्म-दिवस- खूब लड़ी मर्दानी वह तो रानी लक्ष्मीबाई थी

भारत में अंग्रेजी सत्ता के आने के साथ ही गाँव-गाँव में उनके विरुद्ध विद्रोह होने लगा; पर व्यक्तिगत या बहुत छोटे स्तर पर होने के कारण इन संघर्षों को सफलता नहीं मिली। अंग्रेजों के विरुद्ध पहला संगठित संग्राम 1857 में हुआ। इसमें जिन वीरों ने…

थैंक यु, मि. गोडसे

  डॉ. शंकर शरण नाथूराम गोडसे के नाम और उनके एक काम के अतिरिक्त लोग उन के बारे में कुछ नहीं जानते। एक लोकतांत्रिक देश में यह कुछ रहस्यमय बात है। रहस्य का आरंभ 8 नवंबर 1948 को ही हो गया था, जब गाँधीजी की हत्या के लिए चले मुकदमे में गोडसे…

शत-शत नमन 17 नवम्बर/पुण्य-तिथि, हिन्दू जागरण के सूत्रधार अशोक सिंघल जी।

श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन के दौरान जिनकी हुंकार से रामभक्तों के हृदय हर्षित हो जाते थे, वे श्री अशोक सिंहल संन्यासी भी थे और योद्धा भी; पर वे स्वयं को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एक प्रचारक ही मानते थे।

15नवंबर- जनजातीय गौरव दिवस विशेष- वीरांगना रानी दुर्गावती

इनका जन्म 5 अक्टूबर, 1524 ईस्वी को हुआ था। ये अंग्रेजों के शासन से कई 3 सदी पहले की वीरांगना थीं। मध्य प्रदेश के गोंडवाना में उनका शासन था। जिस गढ़मंडला राज्य पर उनका शासन था, उसका केंद्र जबलपुर में था। उनके पति गौड़ राजा दलपत शाह की…

 एक नौजवान स्वतंत्रता सेनानी और उसकी पत्नि का ऐसा संवाद जिसे पढकर सिहर उठेंगे

एक कल्पना कीजिए... तीस वर्ष का पति जेल की सलाखों के भीतर खड़ा है और बाहर उसकी वह युवा पत्नी खड़ी है, जिसका बच्चा हाल ही में मृत हुआ है...

धर्म रक्षा के लिए गुरु तेगबहादुर जी का बलिदान

एक बार सिखों के नवें गुरु श्री तेगबहादुर जी हर दिन की तरह दूर-दूर से आये भक्तों से मिल रहे थे। लोग उन्हें अपनी निजी समस्याएँ तो बताते ही थे; पर मुस्लिम अत्याचारों की चर्चा सबसे अधिक होती थी।

सप्त चिरंजीवी और ऋषि मार्कंडेय

हमारे धर्मग्रंथो में एक श्लोक है:- अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनुमांश्च विभीषणः। कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरंजीविनः॥ सप्तैतान् संस्मरेन्नित्यं मार्कण्डेयमथाष्टमम्। जीवेद्वर्षशतं सोपि सर्वव्याधिविवर्जित।।