Browsing Category

व्यक्तित्व

🌹दान की महिमा 🌹

एक भिखारी सुबह-सुबह भीख मांगने निकला। चलते समय उसने अपनी झोली में जौ के मुट्ठी भर दाने डाल दिए, इस अंधविश्वास के कारण कि भिक्षाटन के लिए निकलते समय भिखारी अपनी झोली खाली नहीं रखते। थैली देखकर दूसरों को भी लगता है कि इसे पहले से ही किसी ने…

स्वयं को न कोसे,स्वयं पर भरोसा रखे !

*संतों की एक सभा चल रही थी... किसी ने एक दिन एक घड़े में गंगाजल भरकर वहां रखवा दिया ताकि संत जन जब प्यास लगे तो गंगाजल पी सकें... संतों की उस सभा के बाहर एक व्यक्ति खड़ा था. उसने गंगाजल से भरे घड़े को देखा तो उसे तरह-तरह के विचार आने…

अकबर साहेब ने प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की गुजरात से लेकर विश्व नेता बनने तक की यात्रा को दर्शाया…

केंद्रीय संस्कृति, पर्यटन और उत्तरी-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने आज नई दिल्ली में नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट में जाने-माने चित्रकार अकबर साहेब की पेंटिंग्‍स की एक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।

बन्दा वीर बैरागी- हिरणी से लेकर वीरगति तक की कहानी

बन्दा बैरागी का जन्म 27 अक्तूबर, 1670 को ग्राम तच्छल किला, पुंछ में श्री रामदेव के घर में हुआ। उनका बचपन का नाम लक्ष्मणदास था। युवावस्था में शिकार खेलते समय उन्होंने एक गर्भवती हिरणी पर तीर चला दिया। इससे उसके पेट से एक शिशु निकला और तड़पकर…

ऋषि सुनक की आधिकारिक वंशावली

सुनक गुजरांवाला के एक पंजाबी खत्री परिवार के हैं, जो अब पाकिस्तान में है । ऋषि सुनक के दादा रामदास सुनक ने 1935 में नैरोबी में क्लर्क के रूप में काम करने के लिए गुजरांवाला छोड़ दिया था ।

25 सितम्बर/जन्म-दिवस”: एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय

सुविधाओं में पलकर कोई भी सफलता पा सकता है; पर अभावों के बीच रहकर शिखरों को छूना बहुत कठिन है। 25सितम्बर,1996 में जयपुर से अजमेर मार्ग पर स्थित ग्राम धनकिया में अपने नाना पण्डित चुन्नीलाल शुक्ल के घर जन्मे दीनदयाल उपाध्याय जी ऐसी ही विभूति…

‘स्टैंड अप कमेडी’ के ‘सोशल सर्जन’ थे राजू श्रीवास्तव

अजय बोकिल हमारे देश में काॅमेडी की परंपरा पुरानी होते हुए भी ‘स्टैंड अप काॅमेडी’ कला और इसे परफार्म करने वाले कलाकारों का कोई शास्त्रीय आकलन शायद ही हुआ है। कला जगत में उनकी स्थिति ‍स्टेज के ट्रांसजेंडर कलाकारों जैसी रही है। न थियेटर में न…

विलक्षण हैं भारतीय वाद्ययंत्र

सनातन हिंदू दर्शन में सृष्टि की उत्पत्ति नाद से मानी जाती है। हमारे यहां इस नाद को ब्रह्म की संज्ञा दी गयी है। भारतीय ऋषियों की मान्यता है कि समूचे विश्व ब्रह्माण्ड में अनहद नाद (ओम् की ध्वनि) सतत गूंजता रहता है। इस तथ्य को अब नासा ने भी…