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व्यक्तित्व
25 सितम्बर/जन्म-दिवस”: एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय
सुविधाओं में पलकर कोई भी सफलता पा सकता है; पर अभावों के बीच रहकर शिखरों को छूना बहुत कठिन है। 25सितम्बर,1996 में जयपुर से अजमेर मार्ग पर स्थित ग्राम धनकिया में अपने नाना पण्डित चुन्नीलाल शुक्ल के घर जन्मे दीनदयाल उपाध्याय जी ऐसी ही विभूति…
‘स्टैंड अप कमेडी’ के ‘सोशल सर्जन’ थे राजू श्रीवास्तव
अजय बोकिल
हमारे देश में काॅमेडी की परंपरा पुरानी होते हुए भी ‘स्टैंड अप काॅमेडी’ कला और इसे परफार्म करने वाले कलाकारों का कोई शास्त्रीय आकलन शायद ही हुआ है। कला जगत में उनकी स्थिति स्टेज के ट्रांसजेंडर कलाकारों जैसी रही है। न थियेटर में न…
विलक्षण हैं भारतीय वाद्ययंत्र
सनातन हिंदू दर्शन में सृष्टि की उत्पत्ति नाद से मानी जाती है। हमारे यहां इस नाद को ब्रह्म की संज्ञा दी गयी है। भारतीय ऋषियों की मान्यता है कि समूचे विश्व ब्रह्माण्ड में अनहद नाद (ओम् की ध्वनि) सतत गूंजता रहता है। इस तथ्य को अब नासा ने भी…
अपनी ही अदालत में मुकदमा हारते खड़े अटल…
भारतीय राजनीति क्या विश्व राजनीति में भी अगर कोई एक नाम बिना किसी विवाद के कभी लिया जाएगा तो वह नाम होगा अटल बिहारी वाजपेयी का। यह एक ऐसा नाम है जिस के पीछे काम तो कई जुड़े हुए हैं पर विवाद शून्य हैं। राजनीति काजल की कोठरी है, इस में से…
क्षत्रिय राजपूत राजा चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य परमार के बारे में कुछ रोचक तथ्य
पवन कुमार सरजी।
विक्रमादित्य का नाम उनके जन्म से पहले ही भगवान शिव ने रख दिया था।
विक्रमादित्य परमार वंश के 8 वें राजा थे।
विक्रमादित्य ने मात्र 20 वर्ष की उम्र में ही शकों को पूरे एशिया से खदेड़ दिया था। विक्रमादित्य ने भारत और एशिया को…
23 जुलाई 1856: लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की जयंती पर उन्हें कोटि कोटि नमन
पवन कुमार।
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक(जन्म : 23 जुलाई 1856 मृत्यु : 1 अगस्त 1920)
भारत के स्वतंत्रता सेनानियों में बाल गंगाधर तिलक का नाम बड़े ही सम्मान से लिया जाता है। उन्होंने हमारे देश को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त करवाने में…
डॉ गोपालदासनीरज’ जी की पुण्यतिथि: ‘पद्मश्री’ व ‘पद्मभूषण’ से दो बार…
आर के सिन्हा।
'पद्मश्री' व 'पद्मभूषण' से दो बार सम्मानित मशहूर हिंदी साहित्यकार यशकाय शेष गीत सम्राट डॉ गोपालदासनीरज' जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ ! गोपालदास सक्सेना 'नीरज' का जन्म 4 जनवरी 1925 को उ.प्र. के…
मंथन- धर्म की अवधारणा-आचार: प्रथमो धर्म:
पार्थसारथि थपलियाल
लोग अक्सर धर्म की बात तो करते हैं लेकिन धर्म को जानते नही हैं। कोई मंदिर जाने को धर्म कह देगा, कोई तिलक लगाने को धर्म कह देगा। कुछ लोग रीति रिवाज को तो कोई परंपराओं को धर्म मान लेता है। यह सब अज्ञानताएं हैं। भारतीय…
पाथेय-3- भारतीयता को जकड़ता शब्दों का भंवर जाल (9)
पार्थसारथि थपलियाल
अपने मंतव्य स्थापित करते भ्रामक शब्द - डॉ. वैद्य
स्थान था कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का सभागार। इस सभागार में पंचनद शोध संस्थान का दो दिवसीय मंथन शिविर चल रहा था। विद्वान वक्ताओं में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह…
पाथेय सार- 2- भारत अपने स्व को पहचाने (8)
पार्थसारथि थपलियाल
हिन्दू कट्टर नही हो सकता - सह-सरकार्यवाह जी
डॉ. मनमोहन वैद्य जी ने जीवन में प्रतियोगिता कारण होनेवाले तनाव की ओर आकर्षित करते हुए कहा कि इस दौर में मनुष्य के सामने जीवन के लक्ष्य की बजाय जीवन की सफलता को साध्य के…