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विचार

मंथन- पंचनद : विमर्श का सांगोपांग मंथन (3)

पार्थसारथि थपलियाल उद्देश्य का ज्ञान होने पर भी केवल आगे दौड़ने का मतलब यह है कि आप सिर्फ उद्देश्य के लिए दौड़ते रहे। जैसा कुछ किताबों को पढ़ने के बाद उत्तम स्मृति का प्रदर्शन सफल व्यक्ति की पहचान बन जाती है लेकिन गौर करने की बात तो यह भी…

मिर्च-मसाला-  जो सवाल वरुण ने उठाए, देश से मिला जवाब

त्रिदीब रमण ’यह एक चिराग भी आंधियों के खिलाफ ऐलान हो सकता है सोई कौमें जाग जाएं तो हर बच्चा हिंदुस्तान हो सकता है’ भाजपा के अपने ही सांसद वरुण गांधी ने जब देश के करोड़ों बेरोजगार युवकों के हक की लड़ाई लड़ने का बीड़ा उठाया तो कम ही…

राष्ट्रप्रथम- आत्मनिर्भर बनते भारत पर वक्र दृष्टि

पार्थसारथि थपलियाल रामचरितमानस में धनुषयज्ञ प्रकरण में धनुष टूट जाने के बाद परशुराम राजा जनक के दरबार मे पहुंच जाते हैं जहां सीता स्वयंवर आयोजित था। शिवजी के खंडित धनुष देखते ही परशुराम जब क्रोधाग्नि में आ गए। बोले- यह धनुष किसने…

राष्ट्रप्रथम- अस्त्युत्तरस्यां दिशि देवतात्मा

पार्थसारथि थपलियाल पुराणों में वर्णित केदारखंड (गढ़वाल) और मानसखंड (कुमाऊं) क्षेत्र को समग्र रूप में उत्तराखंड कहा जाता है। 1947 में अंग्रेज़ी शासन से मुक्ति के बाद ब्रिटिश गढ़वाल भारत संघ में मिल गया। 1949 में टिहरी नरेश मानवेन्द्र…

राष्ट्रप्रथम- स्वाधीनता से स्वतंत्रता की ओर बढ़ने की आकांक्षा

पार्थसारथि थपलियल भारत युग युगों से विभिन्न राज्यों सहित एक राष्ट्र रहा है। इस राष्ट्र की एक संस्कृति रही है। एक संस्कृति के कुछ सम्यक जीवन आधार रहे हैं। यह नही कि सब लोग एक तरह का खान पान करते हो या परिधान पहनते हैं। खान पान, रहन…

मंथन- पंचनद : विमर्श का सांगोपांग मंथन (2)

पार्थसारथि थपलियाल कुरुक्षेत्र में 14-15 जून 2022 को पंचनद शोध संस्थान का मंथन शिविर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित किया गया। यह वही कुरुक्षेत्र है जहां द्वापरयुग में भगवान श्रीकृष्ण ने अपने प्रिय सखा अर्जुन को…

मंथन- पंचनद : विमर्श का सांगोपांग मंथन (1)

पार्थसारथि थपलियाल भारतीय संवाद परंपरा में मन में उपजे भावों का विचारों में बदलने के बाद दो स्वरूपों में से एक पक्ष को आधार बनाना है। ये दो पक्ष हैं- परामर्श और विमर्श। परामर्श में सलाह, राय, मत, अभिमत आदि शामिल होते हैं जबकि विमर्श…

राष्ट्रप्रथम- बछिया का खूंटा, जिस पर कूदे बछिया

पार्थसारथि थपलियाल कल 10 जून शुक्रवार देश के अनेक भागों में दोपहर की नमाज के बाद नमाजी सड़कों पर उतर आए और प्रदर्शन करने लगे। इन प्रदर्शनों का कोई घोषित नेता नही था। यह विचारणीय है कि जिस प्रदर्शन का कोई नेता न हो तो वह अचानक कैसे…

राष्ट्रप्रथम- चोर नही चोर की माँ को पकड़ें

पार्थसारथि थपलियाल भारत मे अधिकतर लोगों को यह ज्ञान नही कि बताने, बोलने, कहने, चिल्लाने और भौंकने में शब्दों का ही अंतर नही बल्कि क्रिया का भी अंतर है, भावना और संस्कृति का भी अंतर है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 (1) में वर्णित…

राष्ट्रप्रथम- पंजाब के आब को दूषित करते कड़वे बोल

पार्थसारथि थपलियाल भारत के सच्चे राष्ट्रीय नेता की पार्टी जबसे पंजाब में सरकार बनाई है, तब से ऐसे ऐसे गुल खिला रही है जिसकी कभी उम्मीद भी नही की गई होगी। इस देश मे कई लोगों ने फोर्ड फाउंडेशन की आर्थिक मदद से कई तरह के फ़्रॉड किये,…