Browsing Category

जीजीएन विशेष

ऊॅं क्या है….कैसे हुई इसकी उत्पति… ॐ बोलने से क्या है फायदे..यहां जानें सब…

 ओउम् (ॐ) या ओंकार ईश्वर का वाचक है। ईश्वर के साथ ओंकार का वाच्य-वाचक-भाव सम्बन्ध नित्य है, सांकेतिक नहीं। संकेत नित्य या स्वाभाविक सम्बन्ध को प्रकट करता है। सृष्टि के आदि में सर्वप्रथम ओंकाररूपी प्रणव का ही स्फुरण होता है। तदनन्तर सात…

शराब घोटाले के तार तेलांगना से क्यों जुड़े हैं?

 त्रिदीब रमण  ’एक दिन तुम मुझे छोड़ कर बहुत आगे निकल जाओगे बुना है जो रिश्ता दिलों का लेकर इसके धागे निकल जाओगे’ प्रचार और कथित ईमानदारी की धीमी आंच पर पकती दिल्ली की सियासत पर जब से शराब के छींटे पड़े हैं इसकी लपटें धू-धू कर…

क्वाड भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच एक अनौपचारिक रणनीतिक वार्ता है- मेजर जनरल डॉ राजन…

क्वाड भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच एक अनौपचारिक रणनीतिक वार्ता है- मेजर जनरल डॉ राजन कोचर

विश्व हिन्दू परिषद के अट्ठावन वर्ष और सामाजिक समरसता

हिन्दू समाज की एकता व अखंडता को तार-तार कर उसे जातिवादी, क्षेत्रवादी, भाषावादी व मत-पंथ-संप्रदाय वादी विभेदों में बाँट कर ही मुगलों ने और फिर अंग्रेजों ने भारत पर शासन किया। विपत्ति चाहे अनगिनत आईं किन्तु, यहाँ के बहुसंख्यक हिन्दू समाज में…

संस्कृति- गोत्र, प्रवर, वेद आदि

वैदिक संस्कृति में व्यक्ति की पहचान के लिए गोत्र, प्रवर, देवता, वेद, शाखा और सूत्र का ज्ञान होना आवश्यक था ताकि उसके मूल का पता चल जाए और उचित पहचान स्थापित की जा सके। उच्च वर्ग में इन सभी का उपयोग धार्मिक कार्यों में संकल्प के समय किया…