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फिल्म

पुरुष मात्र संख्या भर नहीं हैं, बल्कि सम्मानित सजीव व्यक्ति हैं: निर्देशक क्लाउडिया सेंट-लूस

पुरुष मात्र संख्या भर नहीं हैं, बल्कि सम्मानित सजीव व्यक्ति हैं। धन बटोरने के चक्कर में लोगों का एक वर्ग इस तथ्य को भूल जाता है और अपहरण एवं मानव तस्करी जैसे जघन्य अपराधों में लिप्त हो जाता है। गोवा में 53वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म…

“यह गहन सामाजिक समस्या को मानवीय रूप से प्रस्‍तुत करने का मेरा प्रयास है”: निर्देशक सौरभ…

मानव तस्करी की शिकार यौनकर्मियों के बचाव और पुनर्वास पर आधारित सौरभ कांति दत्ता की वृत्‍तचित्र फिल्‍म फातिमा को भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (इफ्फी) के 53वें संस्करण में प्रदर्शित किया गया। यह वृत्‍तचित्र फिल्म इसी नाम की एक महिला…

ढोद्रो बनम और अस्थि बांसुरी जैसे आदिवासी संगीत वाद्ययंत्रों का उपयोग करके बनाए गए महानंदा के गीत…

“हम जिस चीज के लिए संघर्ष करते हैं वह भारत के वास्तविक लोगों के लिए है। वे शायद नहीं जानते हैं कि देश का राष्ट्रपति कौन है या कोलकाता या मुंबई कहां है, लेकिन ये भारत के असली लोग हैं।" लेखिका-सामाजिक कार्यकर्ता महाश्वेता देवी के जीवन पर…

ओटीटी और डिजिटल प्लेटफॉर्म की बदौलत अभिनय के क्षेत्र में अवसरों में वृद्धि हुई है: कास्टिंग…

प्रसिद्ध कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा ने कास्टिंग डायरेक्टर की भूमिका के विकास और भारतीय फिल्म उद्योग में कास्टिंग की प्रक्रिया के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि कास्टिंग एक बहुत पुरानी प्रक्रिया है, हालांकि, एक अलग विभाग के रूप में…

“धाबरी कुरुवी” भारतीय फिल्म इतिहास की पहली फीचर फिल्म है, जिसमें केवल जनजातीय लोगों ने किया…

“धाबरी कुरुवी" एक ऐसी आदिवासी लड़की की प्रचंड यात्रा को दिखाती है, जो रूढ़िवाद से लड़ती हैं और खुद को उन जंजीरों से मुक्त करना चाहती हैं, जिनसे समाज व समुदाय ने उसके जैसे दूसरों को जकड़ रखा है। यह भारतीय सिनेमा के इतिहास में पहली फिल्म है,…

“अदर रे: द आर्ट ऑफ सत्यजीत रे” फिल्मकार सत्यजीत रे की रचनात्मक प्रतिभा की जड़ों तक…

इफ्फी-53 में सत्यजीत रे पर विशेष खंड के हिस्से के रूप में जयदीप मुखर्जी की 34 मिनट की गैर-फीचर फिल्म "अदर रे: द आर्ट ऑफ सत्यजीत रे" को 24 नवंबर 2022 को भारतीय पैनोरमा खंड में प्रदर्शित याकिया ग

लोगों के चेहरों पर मुस्कान लाना और उन्हें हंसाना ही मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है: अभिनेता…

“मेरे लिए सफलता का मतलब रोजाना सुबह उठना और वही करना है, जो मुझे पसंद है, और जो मैं हमेशा से करना चाहता था।” यह बात फुकरे फिल्‍म के लोकप्रिय अभिनेता वरुण शर्मा ने कही। वह आज गोवा में 53वें इफ्फी में "इन-कन्वर्सेशन" सत्र में "हाउ टू कार्व…

क्या आप सिनेमाई रोमांचक यात्रा पर जाने के लिए तैयार हैं?

श्रीलंका (तब सीलोन कहा जाता था) में सिनेमा की शुरुआत 1901 में हुई, देश में पहली बार ब्रिटिश गवर्नर वेस्ट रिजवे और दूसरे बोअर युद्ध के कैदियों के लिए एक निजी प्रदर्शन के तहत एक फिल्म दिखाई गई। यह एक लघु फिल्म थी, जिसमें बोअर युद्ध में…

विफलता एक घटना है, कोई व्यक्ति विफल नहीं होता: अनुपम खेर

"जन्म से ही कोई अभिनेता नहीं होता। स्कूल के नाटक में मेरा पहला अभिनय एक आपदा था। लेकिन मेरे पिता ने मुझे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करने के लिए शाम को फूल भेंट किए।” ये बात प्रसिद्ध अभिनेता अनुपम खेर ने आज गोवा में आयोजित 53वें भारतीय…

“मेरी फिल्म उन लोगों के मानवीय पक्ष को चित्रित करने का प्रयास है जिनके साथ अन्याय हुआ…

'सिया' एक असरदार फिल्म है जो हमारी सामाजिक न्याय प्रणाली को प्रतिबिंबित करती है। ये उन लोगों के मानवीय पक्ष को चित्रित करने का प्रयास है जिनके साथ अन्याय हुआ है। ये बातें कहीं फिल्म 'सिया' के निर्देशक मनीष मूंदड़ा ने, जो कि इंसाफ के लिए एक…