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विचार
धर्म रक्षा के लिए गुरु तेगबहादुर जी का बलिदान
एक बार सिखों के नवें गुरु श्री तेगबहादुर जी हर दिन की तरह दूर-दूर से आये भक्तों से मिल रहे थे। लोग उन्हें अपनी निजी समस्याएँ तो बताते ही थे; पर मुस्लिम अत्याचारों की चर्चा सबसे अधिक होती थी।
सप्त चिरंजीवी और ऋषि मार्कंडेय
हमारे धर्मग्रंथो में एक श्लोक है:-
अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनुमांश्च विभीषणः।
कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरंजीविनः॥
सप्तैतान् संस्मरेन्नित्यं मार्कण्डेयमथाष्टमम्।
जीवेद्वर्षशतं सोपि सर्वव्याधिविवर्जित।।
स्वस्थ रहना आपका अधिकार है…
डॉक्टर अरुणिमा। यदि आप 45 वर्ष से अधिक हैं, तो यह लेख आपके लिए है-*
वामियों की वैचारिक विफलता
फिलहाल सोशल मीडिया पर वामियोँ के दिन अच्छे नही है, ऐसा प्रतीत हो रहा है। एलन मस्क ने ट्विटर पर पूर्ण नियंत्रण पा लिया है और इसके साथ उन्होंने ट्विटर के सी ई ओ पराग अग्रवाल और लीगल हेड विजया गड्डे को बाहर का रास्ता दिखाया। विजया गड्डे को को…
पूर्व में एक ही जाति रही- सनातन हिंदू, अब आगे भी वही होगी….
सम्राट शांतनु ने विवाह किया एक मछुवारे की पुत्री सत्यवती से, उनका बेटा ही राजा बने इसलिए भीष्म ने विवाह न करके आजीवन संतानहीन रहने की भीष्म प्रतिज्ञा की.* सत्यवती के बेटे बाद में क्षत्रिय बन गए, जिनके लिए भीष्म आजीवन अविवाहित रहे, क्या उनका…
🌹दान की महिमा 🌹
एक भिखारी सुबह-सुबह भीख मांगने निकला। चलते समय उसने अपनी झोली में जौ के मुट्ठी भर दाने डाल दिए, इस अंधविश्वास के कारण कि भिक्षाटन के लिए निकलते समय भिखारी अपनी झोली खाली नहीं रखते। थैली देखकर दूसरों को भी लगता है कि इसे पहले से ही किसी ने…
स्वयं को न कोसे,स्वयं पर भरोसा रखे !
*संतों की एक सभा चल रही थी...
किसी ने एक दिन एक घड़े में गंगाजल भरकर वहां रखवा दिया ताकि संत जन जब प्यास लगे तो गंगाजल पी सकें...
संतों की उस सभा के बाहर एक व्यक्ति खड़ा था. उसने गंगाजल से भरे घड़े को देखा तो उसे तरह-तरह के विचार आने…
लोकमंथन (23) लोक परम्पराओं में पर्यावरण और जल संरक्षण
24 सितंबर 2022 को एक महत्वपूर्ण सत्र भारतीय लोक परम्पराओं में पर्यावरण और जल संरक्षण पर केंद्रित था। जल सृष्टि के पंच महाभूत तत्वों में से एक है। वैसे तो धरती का 70 प्रतिशत भाग जल से ही भरा है लेकिन यह पीने योग्य नही है।
विश्वामित्र -राजर्षि से कैसे बने ब्रह्मर्षि
विश्वामित्र का महर्षि वशिष्ठ से झगड़ा था। विश्वामित्र बहुत विद्वान थे। बहुत तप उन्होंने किया। पहले महाराजा थे, फिर साधु हो गये। वशिष्ठ सदा उनको राजर्षि कहते थे।