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विश्लेषण

मीडिया की वर्तमान स्थिति और चुनौतियाँ

*कुमार राकेश वर्ष 1999 की बात हैं.देश के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी थे.देश के सभी पत्रकार यूनियनों के राष्ट्रीय पदाधिकारियो का एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मिलने प्रधानमंत्री आवास 7,रेसकोर्स मार्ग (अब लोक कल्याण मार्ग) पहुंचा.तमाम वरिष्ठ…

”ऐ मेरे प्यारे वतन, ऐ मेरे बिछड़े चमन…”

*डा. प्रकाश हिन्दुस्तानी जब भी देश-प्रेम की बात होती है तब शहादत या बलिदान की बात पहले होती है, या फिर यह बात होती है कि मेरा देश ही सर्वश्रेष्ठ है। सभी को अपना मुल्क ही सबसे अच्छा लगता है। लेकिन आज मैं जिस गाने की बात…

चैट -जी.पी.टी से क्यों डरे हुए हैं लेखक ??

*संजय स्वतंत्र इन दिनों चैट जीपीटी की बड़ी चर्चा है। मेरे पास कई युवा पत्रकारों के फोन आते हैं। उनका यही सवाल होता है कि क्या एआइ (कृत्रिम मेधा) और चैट जीपीटी से हमारा भविष्य खतरे में है। मैं उन्हें कहता हूं, शायद, मगर पूरी तरह नहीं। याद…

मिर्च-मसाला- स्वच्छता आंदोलन के सबसे बड़े पुरोधा को गमगीन विदाई!

त्रिदीब रमण ’इतना मलाल तो सूरज को भी हो रहा है तेरे जाने से तू कब पीछे रहा है बुझे दिलों में चिराग जलाने से’ सुलभ स्वच्छता आंदोलन के पुरोधा पद्म भूषण डॉ. विन्देश्वर पाठक का यूं अचानक चले जाना, स्तब्ध कर देने वाला है। बिहार के एक छोटे…

वा रे पंकज तिरपाठी भिया,,ग़दर तो आपने मचा दिया !!

*डॉ.प्रकाश हिन्दुस्तानी सलंग दो फ़िल्में देखीं। दोनों पुरानी फिल्मों की कड़ियाँ थीं। OMG 2 और ग़दर 2 . ग़दर 2001 में आई थी। OMG 2012 में। दोनों फिल्मों का जॉनर अलग है। दोनों को परिवार के साथ देखा जा सकता है। दोनों फिल्मों की अपनी…

*पंडित बिस्मिल व उनका कवित्व भरा वो अविस्मरणीय अन्दाज़ , जिसके अश्फ़ाक भी क़ायल हुए!!

*प्रस्तुति -:कुमार राकेश राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ की तरह अशफाक उल्ला खाँ भी बहुत अच्छे शायर थे। एक रोज का वाकया है अशफाक आर्य समाज मन्दिर शाहजहाँपुर में बिस्मिल के पास किसी काम से गये। संयोग से उस समय अशफाक जिगर मुरादाबादी की यह गजल…

अविश्वास प्रस्ताव- बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले

पार्थसारथि थपलियाल उत्तराखंड में एक जंगली फल होता है उसे तिमल कहते हैं। बात अभावग्रस्त समय की है। उस समय लोग कुर्ता घुटने घुटने तक पहते थे। 8-10 वर्ष की उम्र के बच्चे कई बार बिना अधोवस्त्र के जंगल में निकल जाते। ऐसा ही एक लड़का था। वह…

राष्ट्रप्रथम-स्वाधीनता से स्वतंत्रता की ओर

पार्थसारथि थपलियाल भारत को 1857 की क्रांति के बाद, (ईस्ट इंडिया कंपनी से) भारत का शासन ब्रिटेन सरकार ने अपने हाथों में पूर्णतः ले लिया था। इस सरकार ने जो दमनकारी नीतियां लागू की उससे भारतीय समाज की स्थिति बहुत खराब हुई और लोगों में…

हरिशंकर परसाई जी पुण्यतिथि विशेष …..

आज हरिशंकर परसाई जी की बरसी है। उनके व्यंग्य की धार ऐसी है कि वक्त बीतने के साथ और तीखी हो रही है.... ... उनके अलग-अलग व्यंग्य लेखों से 20 लाइनें आपके समक्ष रखी हैं, मिर्ची से भी तीखी लगेंगी .... हरिशंकर जी का टी-20

कल की चिंता क्यों ?

कल की चिंता क्यों ? कुमार राकेश एक राजा की पुत्री के मन में वैराग्य की भावनाएं थीं। जब राजकुमारी विवाह योग्य हुई तो राजा को उसके विवाह के लिए योग्य वर नहीं मिल पा रहा था। राजा ने पुत्री की भावनाओं को समझते हुए बहुत सोच-विचार…