कालिंदी कुंज में जल शक्ति मंत्री का स्वच्छता अभियान
यमुना नदी की सफाई और संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय मंत्री सी.आर. पाटिल ने चलाया विशेष अभियान, लोगों से की अपील।
- केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने दिल्ली के कालिंदी कुंज घाट पर यमुना नदी के तट पर स्वच्छता अभियान का नेतृत्व किया।
- इस दौरान उन्होंने नदी की सफाई और घाटों के सौंदर्यीकरण पर जोर देते हुए आम नागरिकों से पॉलीथिन और कचरा न डालने की अपील की।
- स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत चलाए गए इस कार्यक्रम में स्थानीय लोगों और अधिकारियों ने श्रमदान कर यमुना को स्वच्छ बनाने का संकल्प लिया।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 2 अक्टूबर: देशभर में मनाए जा रहे ‘स्वच्छता ही सेवा’ पखवाड़े के तहत राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने नई दिल्ली के प्रसिद्ध कालिंदी कुंज घाट पर यमुना नदी के तट पर एक विशेष स्वच्छता अभियान (Swachhata Drive) का नेतृत्व किया। इस दौरान उनके साथ मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, कर्मचारियों और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं ने श्रमदान किया और घाटों की सफाई की।
यमुना की स्वच्छता और जल संरक्षण पर विशेष जोर
स्वच्छता अभियान के दौरान केंद्रीय मंत्री सी.आर. पाटिल ने यमुना नदी के तटों का निरीक्षण किया और वहां जमा हुए कचरे व प्लास्टिक को हटवाया। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि देश की पवित्र नदियों को प्रदूषण मुक्त रखना हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी है। मंत्री ने कहा कि केवल सरकारी प्रयासों से नदियों को स्वच्छ नहीं किया जा सकता, इसके लिए जब तक समाज का हर वर्ग अपनी सक्रिय भूमिका नहीं निभाएगा, तब तक पूर्ण सफलता मिलना मुश्किल है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे यमुना नदी में पूजा सामग्री, पॉलीथिन और अन्य प्रकार का कचरा न डालें।
एक जन-आंदोलन के रूप में विकसित हो रही स्वच्छता की संस्कृति
कार्यक्रम के अंत में जल शक्ति मंत्री ने उपस्थित जनसमूह को स्वच्छता की शपथ दिलाई और पर्यावरण को बचाने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्वच्छता अब एक आदत और जन-आंदोलन का रूप ले चुकी है। सरकार जल स्रोतों के पुनरुद्धार और उनके संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। इस प्रकार के अभियानों से न केवल जल स्रोतों की गुणवत्ता में सुधार होता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण का निर्माण भी सुनिश्चित होता है।
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