डेयरी सहकारिता से बदलेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था: अमित शाह
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि सहकारी डेयरी व्यवस्था किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और महिला सशक्तिकरण को गति दे सकती है।
- डेयरी सहकारिता को ग्रामीण विकास का अहम माध्यम बताया।
- दूध उत्पादकों को बेहतर बाजार और मूल्य उपलब्ध कराने पर जोर।
- महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण रोजगार से जोड़ने की बात।
समग्र समाचार सेवा
भोपाल, 3 अक्टूबर: केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि सहकारिता और डेयरी क्षेत्र में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदलने की व्यापक क्षमता है। उनके मुताबिक, संगठित सहकारी व्यवस्था के जरिए पशुपालकों को बेहतर बाजार, दूध का उचित मूल्य और प्रसंस्करण से होने वाले अतिरिक्त आर्थिक लाभ से जोड़ा जा सकता है।
अमित शाह ने मध्य प्रदेश के भोपाल में आयोजित गौपालक सम्मेलन को संबोधित करते हुए डेयरी क्षेत्र में सहकारी मॉडल को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सहकारी व्यवस्था का विस्तार पशुपालकों, किसानों और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद कर सकता है।
बिचौलियों से राहत पर जोर
अमित शाह के अनुसार, खुले बाजार में दूध बेचने वाले पशुपालकों को कई बार उनकी उपज का पर्याप्त मूल्य नहीं मिल पाता। सहकारी व्यवस्था के जरिए उत्पादकों को संगठित बाजार से जोड़ने के साथ-साथ दूध के प्रसंस्करण और वैल्यू एडिशन से मिलने वाले लाभ में उनकी भागीदारी बढ़ाई जा सकती है।
दूध से मक्खन, घी, पनीर, आइसक्रीम और अन्य मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने के लिए आधुनिक प्रसंस्करण ढांचे को महत्वपूर्ण बताया गया है।
व्हाइट रिवोल्यूशन 2.0 पर फोकस
सरकार की व्हाइट रिवोल्यूशन 2.0 पहल के तहत देशभर में 75,000 नई सहकारी डेयरियां स्थापित करने और 46,000 मौजूदा डेयरियों को मजबूत करने का लक्ष्य बताया गया है। मध्य प्रदेश में भी इस पहल के तहत बड़ी संख्या में डेयरी सहकारी समितियों को विकसित करने की योजना है।
इसका उद्देश्य पशुपालकों को संगठित बाजार, बेहतर कीमत, आधुनिक प्रसंस्करण सुविधाओं और मजबूत सहकारी नेटवर्क से जोड़ना है।
पशुपालकों की आय बढ़ाने पर जोर
अमित शाह ने डेयरी क्षेत्र में नस्ल सुधार को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि आधुनिक प्रजनन तकनीकों के इस्तेमाल से पशुओं की सेहत और दूध उत्पादन क्षमता में सुधार किया जा सकता है।
मध्य प्रदेश में गाय और भैंसों के नस्ल सुधार कार्यक्रमों के लिए 50 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने की दिशा में भी पहल की गई है। इसके साथ देशी नस्लों के संरक्षण और आधुनिक प्रजनन तकनीकों को बढ़ावा देने की बात कही गई।
भारत के डेयरी क्षेत्र में बढ़ा उत्पादन
अमित शाह ने भारत के डेयरी क्षेत्र में उत्पादन और प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता में वृद्धि का भी उल्लेख किया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2014-15 में देश का दूध उत्पादन करीब 14.60 करोड़ टन था, जो अब लगभग 24.80 करोड़ टन तक पहुंच गया है। इसी अवधि में प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता करीब 307 ग्राम प्रतिदिन से बढ़कर 485 ग्राम प्रतिदिन बताई गई है।
भारत वर्तमान में दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है। सरकार डेयरी क्षेत्र को प्रसंस्करण, तकनीक और निर्यात के जरिए और मजबूत करने पर जोर दे रही है।
महिलाओं के लिए आर्थिक अवसर
अमित शाह ने डेयरी सहकारिता को महिला सशक्तिकरण से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि डेयरी गतिविधियों से होने वाली आय सीधे महिलाओं तक पहुंचने से ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है।
उनके अनुसार, सहकारी डेयरी मॉडल ग्रामीण विकास, किसानों की आर्थिक प्रगति और महिलाओं के सशक्तिकरण के बीच महत्वपूर्ण कड़ी बन सकता है।
गोबर से अतिरिक्त आय की संभावना
डेयरी अर्थव्यवस्था को सर्कुलर इकोनॉमी से जोड़ने की दिशा में गोबर के वैज्ञानिक उपयोग पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके तहत गोबर से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण और ग्रामीण रोजगार के अवसर पैदा करने की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है।
सरकार का लक्ष्य गोबर को पशुपालकों और किसानों के लिए अतिरिक्त आय के स्रोत के रूप में विकसित करने की दिशा में मॉडल तैयार करना है।
मध्य प्रदेश में डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार
भोपाल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उज्जैन में प्रतिदिन 3 लाख लीटर क्षमता वाले दूध प्रसंस्करण संयंत्र की आधारशिला रखी गई। इस परियोजना की लागत करीब 255 करोड़ रुपये बताई गई है।
भोपाल में 40,000 लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले प्रोडक्ट डेयरी प्लांट और राज्य स्तरीय केंद्रीय प्रयोगशाला का भी उद्घाटन किया गया। शिवपुरी की मिनी डेयरी के सुदृढ़ीकरण का काम भी शुरू किया गया।
सहकारिता से ग्रामीण विकास की दिशा
सरकार की सहकारिता नीति के तहत डेयरी, कृषि और पशुपालन से जुड़े लोगों को स्थानीय स्तर पर संगठित करने और उन्हें बाजार तथा प्रसंस्करण सुविधाओं से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
अमित शाह ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर सहकारिता तथा डेयरी क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रही हैं। इसका उद्देश्य पशुपालकों की आय, ग्रामीण रोजगार और महिला आर्थिक भागीदारी को बढ़ाना है।
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