- लड़के की कीमत लड़कियों से दोगुनी होती थी।
- अस्पताल के जरिए दस्तावेजों का फर्जीवाड़ा होता था।
- शिशुओं को “जुड़वा” बताकर भी धोखा दिया गया।
- गरीब परिवारों का शोषण इस काले धंधे की जड़ है।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली 20 जून : पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो नवजात शिशुओं को राजस्थान और गुजरात के गरीब परिवारों से खरीदकर दिल्ली में बेचता था। इस काले बाज़ार में लड़कों की कीमत 6 से 8 लाख रुपये और लड़कियों की कीमत 3 से 4 लाख रुपये तक होती थी।
गिरोह का खुलासा और गिरफ्तारी
दिल्ली के पहाड़गंज इलाके में एक महिला को बार-बार अलग-अलग नवजात शिशुओं के साथ देखा गया। पुलिस ने छुपा एजेंट बनकर सौदा किया और महिला को एक बच्चे के साथ गिरफ्तार किया। पूछताछ में अन्य सहयोगियों और अस्पताल के मालिक डॉ. विवेकी का नाम सामने आया। कुल मिलाकर अब तक 5 नवजात शिशु बरामद किए गए हैं।
अस्पताल का भंडाफोड़
पुलिस ने पाया कि पश्चिम दिल्ली के रोहिणी इलाके में हिरा मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल इस रैकेट का केंद्र था। अस्पताल के मालिक डॉ. विवेकी ने जन्म प्रमाण पत्र और फर्जी दस्तावेज तैयार कर इस कारोबार को वैध दिखाने में मदद की।
शिशुओं की आपूर्ति और बिक्री
गुजरात और राजस्थान के गरीब परिवारों से बच्चों को खरीदा जाता था। शिशुओं को अस्पताल में रखा जाता था और फिर वे उन्हें मध्य प्रदेश, हरियाणा के दंपतियों को बेचे जाते थे। इस काले धंधे में करीब 30 शिशुओं के लेन-देन का पता चला है।
पुलिस की कार्रवाई और आगे की योजना
गिरफ्तार आरोपी परिवारों को भी आरोपी बनाया जाएगा यदि वे बच्चों को अपने स्वेच्छा से बेचते पाए गए। पांच शिशुओं को बाल कल्याण समिति के संरक्षण में रखा गया है। मामले की जांच जारी है और पुलिस और अधिक आरोपी पकड़ने की कोशिश कर रही है। पुलिस में महिला अधिकारियों की भूमिका सराहनीय रही।
यह मामला समाज के लिए एक बड़ा चेतावनी संकेत है कि गरीब और असहाय लोगों की मजबूरी का दुरुपयोग कर अपराधी जीवन को कैसे व्यापार का माध्यम बना लेते हैं।
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