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- केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने निवेशकों से त्रिपुरा की विकास यात्रा में भागीदार बनने का आह्वान किया।
- प्रधानमंत्री मोदी की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति से त्रिपुरा दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए भारत का रणनीतिक प्रवेशद्वार बन रहा है।
- मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा के नेतृत्व में त्रिपुरा निवेश-अनुकूल, आधुनिक अधोसंरचना और कनेक्टिविटी से समृद्ध राज्य के रूप में उभर रहा है।
- त्रिपुरा प्राकृतिक संसाधनों, शिक्षित मानव संसाधन और आधुनिक लॉजिस्टिक्स के साथ विनिर्माण, निर्यात, तकनीक व बागवानी उद्योग के लिए आदर्श गंतव्य है।
समग्र समाचार सेवा
त्रिपुरा , 10 जुलाई : निवेशकों को त्रिपुरा के विकास में भागीदारी का आह्वान केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास एवं संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ‘डेस्टिनेशन त्रिपुरा बिजनेस कॉन्क्लेव 2026’ में देश-विदेश के निवेशकों से त्रिपुरा की विकास यात्रा में सहभागी बनने की अपील की। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा आज पूर्वोत्तर के सबसे संभावनाशील निवेश गंतव्यों में से एक है, जो उद्योग, निवेश और वैश्विक व्यापार के लिए नए अवसर प्रदान कर रहा है।
‘एक्ट ईस्ट’ नीति से बदल रहा है त्रिपुरा का भूगोल सिंधिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति की सराहना करते हुए कहा कि इस नीति ने पूर्वोत्तर भारत को सीमांत क्षेत्र से बदलकर दक्षिण-पूर्व एशिया के प्रवेश द्वार में तब्दील कर दिया है। इससे व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के अभूतपूर्व अवसर उत्पन्न हुए हैं।
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मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा के नेतृत्व में समृद्ध त्रिपुरा सिंधिया ने मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा के नेतृत्व में त्रिपुरा के तेज़ विकास की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि राज्य न केवल एक बेहतर कनेक्टिविटी, बल्कि आधुनिक अधोसंरचना और निवेश-अनुकूल माहौल के रूप में उभर रहा है। उन्होंने आगे बताया कि अगरतला अब 67 करोड़ से अधिक आबादी वाले आसियान (ASEAN) बाजार से भारत को जोड़ने वाला रणनीतिक प्रवेश द्वार बन रहा है।
प्राकृतिक संसाधनों और अधोसंरचना में त्रिपुरा की मजबूती त्रिपुरा प्राकृतिक गैस, बांस, अगरवुड, रबर, चाय, मसाले और बागवानी उत्पादों जैसे संसाधनों से समृद्ध है। राज्य में शिक्षित मानव संसाधन, निवेश-अनुकूल नीतियां, तेज़ी से विकसित होती आधारभूत संरचना और तीसरा अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट गेटवे मौजूद हैं। त्रिपुरा देश का सबसे बड़ा बांस उत्पादक और प्राकृतिक रबर का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, जिससे विनिर्माण, खाद्य प्रसंस्करण, लॉजिस्टिक्स और निर्यात क्षेत्रों में अपार संभावनाएँ हैं।
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अधोसंरचना: निवेशकों के विश्वास की नींव सिंधिया ने बताया कि पिछले दशक में केंद्र सरकार ने कनेक्टिविटी, आधुनिक अधोसंरचना और संस्थागत सहयोग के माध्यम से पूर्वोत्तर के विकास को नई दिशा दी है। भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग, कालादान मल्टीमॉडल ट्रांजिट परियोजना, सबरूम SEZ, मैत्री सेतु और एकीकृत चेक पोस्ट जैसी परियोजनाएँ त्रिपुरा को दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए भारत के निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित कर रही हैं।
‘अष्टलक्ष्मी राज्य’ और भविष्य की आर्थिक यात्रा अंत में, सिंधिया ने कहा कि कभी भू-आवेष्ठित (Landlocked) माने जाने वाले त्रिपुरा ने अब बंगाल की खाड़ी तक पहुँच बना ली है। यह बदलाव प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर के व्यापक परिवर्तन का प्रमाण है। सिंधिया ने विश्वास जताया कि ‘अष्टलक्ष्मी राज्य’ भारत की आगामी आर्थिक विकास यात्रा का नेतृत्व करेंगे, और त्रिपुरा इसका एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।


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