पूर्व सांसद और SIS ग्रुप के संस्थापक RK सिन्हा का निधन
बिहार से भाजपा के पूर्व राज्यसभा सांसद और सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज (SIS) के संस्थापक डॉ. रवींद्र किशोर सिन्हा का नोएडा आवास पर निधन।
- पूर्व राज्यसभा सांसद और SIS संस्थापक आरके सिन्हा का निधन।
- नोएडा स्थित आवास पर ली अंतिम सांस, राजनीतिक जगत में शोक।
- अंतिम दर्शन के लिए पार्थिव शरीर पटना ले जाने की तैयारी।
समग्र समाचार सेवा
पटना/नोएडा, 30 अक्तूबर: भारतीय राजनीति और व्यापारिक जगत से एक बेहद दुखद और बड़ी खबर सामने आई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता, बिहार से पूर्व राज्यसभा सांसद और देश की अग्रणी सुरक्षा एजेंसी ‘सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज’ (SIS Group) के संस्थापक चेयरमैन डॉ. रवींद्र किशोर सिन्हा (आरके सिन्हा) का शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को निधन हो गया। उन्होंने उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली।
75 वर्षीय डॉ. आरके सिन्हा के निधन की खबर फैलते ही देश भर के राजनीतिक, सामाजिक और कारोबारी गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे देश, बिहार और उद्यमिता क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।
नोएडा से पटना लाया जाएगा पार्थिव शरीर, राजकीय सम्मान से हो सकता है अंतिम संस्कार
पारिवारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, डॉ. आरके सिन्हा के पार्थिव शरीर को नोएडा स्थित आवास से अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि के लिए बिहार की राजधानी पटना लाया जा रहा है। पटना स्थित उनके आवास पर पार्टी कार्यकर्ताओं, समर्थकों, शुभचिंतकों और आम जनता के अंतिम दर्शन के लिए व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
बिहार सरकार और भाजपा संगठन की ओर से उनके अंतिम संस्कार को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। संभावना जताई जा रही है कि पूर्व सांसद और प्रख्यात उद्यमी होने के नाते उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान (State Honours) के साथ पटना में गंगा तट पर संपन्न किया जाएगा।
पत्रकारिता से शुरू हुआ सफर, बनाई हजारों करोड़ की सिक्योरिटी एम्पायर
22 सितंबर 1951 को बिहार के बक्सर में जन्मे डॉ. आरके सिन्हा का जीवन संघर्ष, नेतृत्व और सफलता की एक अद्भुत मिसाल रहा है। राजनीति विज्ञान और कानून में स्नातक करने के बाद उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक निर्भीक पत्रकार के रूप में की थी। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उन्होंने युद्ध संवाददाता के रूप में रिपोर्टिंग भी की थी।
1971 के युद्ध के बाद सेवानिवृत्त और भूतपूर्व सैनिकों (Ex-servicemen) के पुनर्वास और रोजगार की सोच के साथ उन्होंने महज कुछ हजार रुपयों से ‘सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज’ (SIS) की स्थापना की थी। आज यह कंपनी न केवल भारत बल्कि ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों में लाखों लोगों को रोजगार देने वाली बहुराष्ट्रीय निजी सुरक्षा कंपनी बन चुकी है। एक छोटे से व्यवसाय से शुरू होकर हजारों करोड़ रुपये का एम्पायर खड़ा करने वाले आरके सिन्हा को भारत में प्राइवेट सिक्योरिटी इंडस्ट्री का जनक भी माना जाता है।
भाजपा से राज्यसभा सांसद और समाजसेवा में रहा अतुलनीय योगदान
व्यवसाय के साथ-साथ डॉ. आरके सिन्हा भारतीय जनता पार्टी के एक निष्ठावान और प्रमुख स्तंभ रहे। वर्ष 2014 से 2020 तक उन्होंने बिहार से राज्यसभा सांसद के रूप में संसद के उच्च सदन में प्रतिनिधित्व किया। वे राष्ट्रवाद और सामाजिक सरोकारों से गहराई से जुड़े रहे। राजनीति और व्यवसाय के अलावा उन्होंने सामाजिक कार्यों, शिक्षा और कला-संस्कृति के संरक्षण के लिए कई ट्रस्ट और धर्मार्थ संस्थाएं स्थापित कीं।
कायस्थ समाज और बिहार के सामाजिक विकास में उनका योगदान ऐतिहासिक माना जाता है। आपदाओं के समय राहत कार्यों से लेकर हजारों गरीब परिवारों की मदद करने में वे हमेशा अग्रणी भूमिका में रहते थे।
निष्कर्ष
डॉ. आरके सिन्हा का जाना भारतीय उद्यमिता और राजनीति के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत है। एक पत्रकार से लेकर देश के सबसे बड़े सुरक्षा उद्योगपति और सांसद तक का उनका सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
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