जीएसटी व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी
गिरफ्तारी प्रावधान हटाने और अभियोजन सीमा पांच करोड़ करने की सिफारिश
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- जीएसटी कानून में गिरफ्तारी संबंधी प्रावधान हटाने की सिफारिश।
- अभियोजन की मौद्रिक सीमा एक करोड़ से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव।
- कुछ अपराधों के प्रावधानों को हटाने या उनका दायरा सीमित करने की तैयारी।
- छोटे कारोबारियों के लिए अनुपालन और कर प्रशासन को सरल बनाने पर जोर।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 12 अक्टूबर : देश की वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था को सरल और व्यापार-अनुकूल बनाने की दिशा में जीएसटी परिषद ने महत्वपूर्ण सुधारों की सिफारिश की है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में 8 अक्टूबर को हुई परिषद की 57वीं बैठक में गिरफ्तारी संबंधी प्रावधानों को हटाने और अभियोजन की वित्तीय सीमा बढ़ाने सहित कई प्रस्तावों पर निर्णय लिया गया।
इन सिफारिशों का उद्देश्य कर अनुपालन को सरल बनाना, अनावश्यक कानूनी विवाद कम करना और व्यापारियों के लिए अधिक भरोसेमंद प्रशासनिक वातावरण तैयार करना है।
कर प्रशासन में दंडात्मक शक्तियों की समीक्षा
जीएसटी लागू होने के बाद कर संग्रह और अनुपालन के साथ-साथ कर अधिकारियों की शक्तियों को लेकर भी समय-समय पर चर्चा होती रही है।
व्यापारिक संगठनों की ओर से कर विवादों के समाधान में सरलता और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की मांग उठाई जाती रही है।
जीएसटी परिषद की नई सिफारिशें इसी व्यापक सुधार प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
अभियोजन की सीमा में बड़ा बदलाव
परिषद ने जीएसटी संबंधी अभियोजन की मौद्रिक सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने की सिफारिश की है।
इसके अतिरिक्त कुछ अपराधों के दायरे को सीमित करने तथा कारावास संबंधी प्रावधानों को युक्तिसंगत बनाने का प्रस्ताव भी सामने आया है।
प्रस्तावित व्यवस्था में न्यायालय को कुछ मामलों में केवल जुर्माना लगाने का विवेकाधिकार देने और न्यूनतम छह महीने की कैद के प्रावधान को हटाने की सिफारिश की गई है।
छोटे व्यापारियों और उद्योगों पर संभावित असर
जीएसटी प्रशासन में सरलता से छोटे और मध्यम उद्यमों को विशेष लाभ मिल सकता है।
इन व्यवसायों के लिए कर अनुपालन की लागत, रिफंड प्राप्त करने में लगने वाला समय और कानूनी विवादों का आर्थिक प्रभाव महत्वपूर्ण होता है।
यदि प्रस्तावित सुधार प्रभावी ढंग से लागू होते हैं, तो कर प्रशासन में अनिश्चितता कम होने और व्यापारिक गतिविधियों में सुविधा बढ़ने की संभावना है।
कानून में बदलाव के बाद ही लागू होंगे प्रावधान
यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि परिषद की सिफारिश और कानून में संशोधन दो अलग चरण हैं।
गिरफ्तारी और अभियोजन से जुड़े प्रस्तावित बदलावों को लागू करने के लिए संबंधित कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।
इसलिए व्यापारियों को अंतिम अधिसूचना और संशोधित कानूनी प्रावधानों की पुष्टि के आधार पर ही अपने अनुपालन संबंधी निर्णय लेने चाहिए।
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