आईसीएआर की 25 फसलों की 184 नई किस्में राष्ट्र को समर्पित
शिवराज सिंह चौहान बोले— बीज क्रांति से किसानों की आय में बढ़ोतरी, भारत बनेगा विश्व का फूड बास्केट
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आईसीएआर द्वारा विकसित 25 फसलों की 184 उन्नत किस्मों का लोकार्पण
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राष्ट्रीय बीज निगम ने 33.26 करोड़ रुपये का लाभांश चेक सौंपा
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1969 से अब तक 7205 किस्मों को मंजूरी, मोदी सरकार के 11 वर्षों में 3236 नई किस्में
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चावल उत्पादन में चीन को पछाड़कर भारत ने 150.18 मिलियन टन का रिकॉर्ड बनाया
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली | 4 जनवरी: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा विकसित 25 फसलों की 184 उन्नत किस्में राष्ट्र को समर्पित कीं। यह कार्यक्रम नई दिल्ली के एनएएससी कॉम्प्लेक्स स्थित ए.पी. शिंदे ऑडिटोरियम में आयोजित हुआ, जिसमें वैज्ञानिकों, कृषि विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
बीज क्रांति से कृषि में नई गति
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बीज किसी भी उत्पादन प्रणाली की आत्मा है। उच्च उत्पादक, जलवायु-सहनशील और पोषण-समृद्ध बीजों के विकास से भारतीय कृषि एक नई क्रांति के दौर में प्रवेश कर चुकी है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1969 में अधिसूचना प्रक्रिया शुरू होने के बाद अब तक 7205 फसल किस्मों को मंजूरी दी जा चुकी है।
मोदी सरकार में तेज हुआ नवाचार
कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 11 वर्षों में 3236 नई उच्च उत्पादक किस्में अधिसूचित की गईं, जबकि 1969 से 2014 तक 3969 किस्मों को मंजूरी मिली थी। इससे स्पष्ट है कि हाल के वर्षों में कृषि अनुसंधान और नवाचार की गति तेज हुई है।
जलवायु चुनौतियों का समाधान
लोकार्पित किस्मों में सूखा, बाढ़, लवणीय-क्षारीय मिट्टी और रोग-कीट प्रतिरोध जैसे विशेष गुण मौजूद हैं। ये किस्में बदलते मौसम और जलवायु संकट के बीच किसानों को स्थिर उत्पादन और बेहतर आमदनी का भरोसा देंगी। कई किस्में पोषण-समृद्ध और प्रसंस्करण-उपयुक्त भी हैं, जिससे बाजार में किसानों को बेहतर मूल्य मिल सकेगा।
भारत का बढ़ता खाद्यान्न सामर्थ्य
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत ने चावल उत्पादन में चीन को पीछे छोड़ते हुए 150.18 मिलियन टन का नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह उपलब्धि किसानों, वैज्ञानिकों, शोध संस्थानों और निजी क्षेत्र के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। उन्होंने दोहराया कि भारत अब केवल आत्मनिर्भर नहीं, बल्कि दुनिया को अन्न उपलब्ध कराने वाला देश बन चुका है।
फसल विविधता और पोषण सुरक्षा पर जोर
कार्यक्रम में अनाज, दलहन, तिलहन, चारा फसलों, गन्ना, कपास, जूट और तंबाकू सहित कुल 184 किस्में जारी की गईं। इनमें धान और मक्का की बड़ी संख्या में नई किस्में शामिल हैं, जो पोषण सुरक्षा, जल संरक्षण और फसल विविधीकरण को मजबूती देंगी।
राष्ट्रीय बीज निगम का योगदान
इस अवसर पर राष्ट्रीय बीज निगम की ओर से 33.26 करोड़ रुपये का लाभांश चेक केंद्रीय मंत्री को सौंपा गया। एनएससी की अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. मनिंदर कौर द्विवेदी ने कहा कि बीज आपूर्ति और गुणवत्ता सुधार के माध्यम से किसानों तक नई किस्मों को शीघ्र पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
‘लैब से लैंड’ की सफल यात्रा
कृषि मंत्री ने कहा कि इन किस्मों को तीन वर्षों के भीतर देशभर के किसानों तक पहुंचाने का लक्ष्य है। आईसीएआर, कृषि विश्वविद्यालयों और निजी क्षेत्र के सहयोग से यह ‘लैब से लैंड’ मॉडल भारतीय कृषि को विकसित भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे ले जाएगा।
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