समग्र समाचार सेवा
मुंबई, 21 सितंबर :IIT बॉम्बे में 22 वर्षीय छात्र साहिल रवींद्र वाकोड़े की आत्महत्या के बाद संस्थान में माहौल तनावपूर्ण है। छात्र संगठनों और माता-पिता ने संस्थान प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें शैक्षणिक दबाव, संस्थागत उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव प्रमुख हैं। शुक्रवार को साहिल को मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन और ChatGPT का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया था। इसके कुछ घंटों बाद ही उसने अपने हॉस्टल के कमरे में जान दे दी।
घटना के बाद छात्रों में आक्रोश है। ‘इंडिया अगेंस्ट कास्टिज्म’ बैनर तले छात्र मुख्य द्वार पर एकत्र हुए और प्रशासन से जवाबदेही, पारदर्शिता व मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे पर ठोस कार्रवाई की मांग की। छात्रों ने संस्थान के सामने 18 सूत्रीय मांग पत्र रखा, जिसमें अकादमिक कमेटी में छात्र प्रतिनिधित्व, चार आत्महत्या मामलों की स्वतंत्र जांच, प्रोफेसरों के लिए मानसिक स्वास्थ्य वर्कशॉप की अनिवार्यता, फेयर डिसिप्लिनरी प्रोसेस, और कैंपस में भेदभाव-मुक्त माहौल की गारंटी जैसी मांगें शामिल हैं।
रविवार रात को प्रशासन ने छात्रों से मुलाकात की और उनकी मांगों पर विस्तार से चर्चा की। उम्मीद है कि संस्थान आज औपचारिक बयान जारी कर सकता है।
इधर, IIT बॉम्बे फैकल्टी फोरम ने परीक्षा पर्यवेक्षक सूर्यनारायण दुल्ला के समर्थन में बयान जारी करते हुए कहा कि उन्होंने संस्थान की प्रक्रियाओं के तहत सही कदम उठाया। फोरम ने साहिल की मौत पर दुख जताया और कहा कि प्रोफेसर के खिलाफ की जा रही बयानबाजी से वे मानसिक रूप से आहत हैं।
इस मामले में साहिल के माता-पिता ने एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया है, जिसमें जातिगत भेदभाव के आरोप लगाए गए हैं।
छात्रों का कहना है कि यह IIT बॉम्बे में सात महीनों में तीसरी आत्महत्या है—और आत्महत्या जैसे मामलों में संस्थान की भूमिका, जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर पूरे देश में बहस छिड़ गई है।
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