समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 29 सितंबर: तमिलनाडु के करूर में हुई भयावह भगदड़ की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस हादसे में अब तक 41 लोगों की मौत हो चुकी है और 80 से ज्यादा लोग घायल हैं। रविवार देर रात वेलुसामीपुरम की एक महिला की मौत के बाद मृतकों की संख्या 41 तक पहुंच गई।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इस घटना पर गहरी संवेदना जताई। सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने रविवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन से फोन पर बात कर हादसे के हालात की जानकारी ली। उन्होंने अभिनेता से नेता बने तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) पार्टी अध्यक्ष विजय से भी बातचीत कर उनके समर्थकों की मौत पर शोक संवेदना व्यक्त की।
रैली में अफरातफरी और दर्दनाक हादसा
यह हादसा शनिवार शाम टीवीके की चुनावी रैली के दौरान हुआ था। विजय का भाषण सुनने के लिए हजारों लोग उमड़ पड़े। चश्मदीदों के मुताबिक भीड़ स्थल की क्षमता से कहीं ज्यादा थी। जैसे ही लोग विजय को करीब से देखने की कोशिश में आगे बढ़े, अफरा-तफरी मच गई।
स्थिति और बिगड़ गई जब थोड़ी देर के लिए बिजली गुल हो गई। अंधेरे और भीड़ के दबाव में कई लोग संकरी गलियों में फंस गए। कुछ लोग बेहोश हो गए, तो कई कुचलकर अपनी जान गंवा बैठे।
रविवार रात तक 34 शवों की पहचान हो चुकी थी और उन्हें परिजनों को सौंप दिया गया था। अस्पतालों में भर्ती घायलों में कई की हालत गंभीर बनी हुई है
शोक और राहत की घोषणाएँ
इस हादसे ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर गहरा असर छोड़ा है।
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दुख जताते हुए कहा कि करूर में हुई जनहानि हृदय विदारक है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घटना को “हृदय विदारक” करार दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की।
राजनीति और संवेदना का संगम
राहुल गांधी का यह कदम विपक्ष की ओर से पीड़ित परिवारों के प्रति एकजुटता दिखाने का संकेत है। उन्होंने न सिर्फ राज्य के मुख्यमंत्री से हालात की जानकारी ली, बल्कि विजय से भी सीधे बात कर उनके समर्थकों के लिए संवेदना जताई।
राजनीतिक दृष्टि से भी यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि तमिलनाडु में विपक्षी दलों और क्षेत्रीय पार्टियों का प्रभाव गहरा है। ऐसे में करूर जैसी त्रासदी पर राष्ट्रीय नेताओं का प्रतिक्रिया देना स्वाभाविक है।
करूर की यह त्रासदी केवल तमिलनाडु ही नहीं, पूरे देश के लिए गहरे दुख का कारण बनी है। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाएँ इस बात का संकेत हैं कि राजनीतिक मतभेदों से परे जाकर पीड़ित परिवारों के साथ एकजुटता दिखाई जा रही है। अब चुनौती यह है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए ठोस कदम उठाए जाएँ ताकि कोई और परिवार इस तरह की पीड़ा से न गुजरे।
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