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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लद्दाख में पांच परियोजनाओं के उद्घाटन और राष्ट्र को समर्पण का कार्यक्रम।
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लेह हवाई अड्डे पर ₹640 करोड़ की लागत से नया यात्री टर्मिनल।
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298 किलोमीटर लंबी निमू-पदुम-दारचा सड़क से रणनीतिक संपर्क मजबूत होगा।
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जल संरक्षण, जलविद्युत और प्राचीन शैलचित्रों के संरक्षण से जुड़ी परियोजनाएं शामिल।
समग्र समाचार सेवा | नई दिल्ली/लेह, 15 अक्टूबर : केंद्र सरकार ने लद्दाख में संपर्क व्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, जल संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत के विकास से जुड़ी पांच परियोजनाओं को आगे बढ़ाया है।
प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 15 अक्टूबर को लगभग ₹3,350 करोड़ की इन परियोजनाओं का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उद्घाटन और राष्ट्र को समर्पित करने का कार्यक्रम निर्धारित किया गया।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले लद्दाख में बुनियादी सुविधाओं और संपर्क व्यवस्था को मजबूत करना है।
लेह हवाई अड्डे को आधुनिक यात्री टर्मिनल
लेह के कुशोक बकुला रिम्पोछे हवाई अड्डे पर ₹640 करोड़ की लागत से नया यात्री टर्मिनल तैयार किया गया है।
लगभग 23,800 वर्गमीटर में विकसित इस टर्मिनल की वार्षिक यात्री क्षमता 35 लाख बताई गई है।
ऊर्जा दक्षता के लिए इसमें भू-तापीय ऊर्जा संबंधी तकनीक का भी उपयोग किया गया है।
सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नई सड़क
सीमा सड़क संगठन द्वारा निर्मित 298 किलोमीटर लंबी निमू-पदुम-दारचा सड़क लद्दाख को हिमाचल प्रदेश से जोड़ने वाला एक वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराती है।
यह मार्ग जांस्कर घाटी से होकर गुजरता है और सैन्य रसद व्यवस्था के साथ स्थानीय नागरिकों के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा तथा बाजारों तक पहुंच बेहतर बनाने की क्षमता रखता है।
ऊर्जा, जल और विरासत संरक्षण
अन्य परियोजनाओं में नौ मेगावाट की हानू लघु जलविद्युत परियोजना, दाह-हानू-खाल्त्सी विद्युत पारेषण लाइन, सिंधु घाट पर शैलचित्र संरक्षण उद्यान तथा परियोजना हिम सरोवर के अंतर्गत 40 गांवों में विकसित जलाशय शामिल हैं।
जलाशयों का उद्देश्य मौसमी जल उपलब्धता में अंतर को कम करना और कृषि संबंधी जरूरतों के लिए पानी सुरक्षित रखना है।
विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा का संबंध
लद्दाख जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे का विकास केवल आर्थिक गतिविधियों तक सीमित नहीं होता। इसका संबंध स्थानीय जनजीवन, आपदा प्रबंधन, राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक संपर्क से भी जुड़ा होता है।
इन परियोजनाओं के दीर्घकालिक लाभ इनके रखरखाव, पर्यावरणीय प्रभाव और स्थानीय समुदायों की आवश्यकताओं के अनुरूप उपयोग पर निर्भर करेंगे
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