ग्रेटर बांग्लादेश विवाद: भारत की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा ?

पूनम शर्मा
पूर्व भारतीय राजनयिक दीपक वोहरा  के एक सनसनीखेज दावे ने भारतीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। दावा यह है कि ममता बैनर्जी  और मुहम्मद यूनुस  के बीच कथित रूप से “ग्रेटर बांग्लादेश” को लेकर गुप्त बातचीत हुई थी।

हालांकि इन आरोपों के समर्थन में अब तक कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है, लेकिन इस मुद्दे ने राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमा सुरक्षा और पूर्वोत्तर भारत की स्थिरता को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है।

क्या हैं आरोप ?

दीपक वोहरा का दावा है कि बांग्लादेश में राजनीतिक बदलाव के बाद ममता बनर्जी और मोहम्मद यूनुस के बीच एक गुप्त बैठक हुई थी। इस बैठक में कथित तौर पर पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश को मिलाकर “ग्रेटर बांग्लादेश” बनाने पर चर्चा हुई।

वोहरा के अनुसार, इस प्रस्ताव में ममता बनर्जी को प्रधानमंत्री और यूनुस को राष्ट्रपति बनाने की बात हुई थी। इन दावों ने राजनीतिक गलियारों में भारी विवाद खड़ा कर दिया है।

हालांकि अभी तक इन आरोपों की पुष्टि किसी सरकारी एजेंसी ने नहीं की है।

 भारत की सुरक्षा के नजरिए से क्यों महत्वपूर्ण है मामला?

भारत और बांग्लादेश के बीच लंबी और संवेदनशील सीमा है। पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा, मेघालय और मिजोरम जैसे राज्यों की सीमाएं सीधे बांग्लादेश से जुड़ी हुई हैं।

बीते कई दशकों से अवैध घुसपैठ, जनसंख्या संतुलन में बदलाव, कट्टरपंथी संगठनों की गतिविधियां और सीमा पार नेटवर्क राष्ट्रीय सुरक्षा के बड़े मुद्दे रहे हैं।

ऐसे में “ग्रेटर बांग्लादेश” जैसी किसी भी अवधारणा की चर्चा स्वाभाविक रूप से सुरक्षा एजेंसियों और आम नागरिकों की चिंता बढ़ा देती है।

जमात-ए-इस्लामी का जिक्र क्यों?

राजनीतिक विश्लेषकों ने Jamaat-e-Islami जैसे संगठनों का भी जिक्र किया है। आलोचकों का आरोप है कि कुछ कट्टरपंथी संगठन लंबे समय से क्षेत्र में इस्लामी प्रभाव बढ़ाने की सोच रखते हैं।

 बीजेपी ने तृणमूल पर बोला हमला

Bharatiya Janata Party ने इस मुद्दे को लेकर All India Trinamool Congress पर तीखा हमला बोला है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री  शुभेन्दु अधिकारी  ने कहा कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह देश और राज्य के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात होगा।

बीजेपी नेताओं ने इस मामले की केंद्रीय एजेंसियों से जांच कराने की मांग की है।

 तृणमूल कांग्रेस ने आरोपों को बताया झूठ

तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद और राजनीतिक साजिश करार दिया है। पार्टी का कहना है कि चुनावी हार के बाद विरोधी दल डर और भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।

पार्टी नेताओं का कहना है कि बिना किसी प्रमाण के इस तरह के आरोप लगाना केवल राजनीतिक ध्रुवीकरण की रणनीति है।

 चीन और बांग्लादेश का एंगल

इस विवाद में China का जिक्र भी सामने आया है। मोहम्मद यूनुस के चीन दौरे के दौरान दिए गए कुछ बयानों को भारत के रणनीतिक विश्लेषकों ने गंभीरता से लिया था।

भारत पहले से ही दक्षिण एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर सतर्क है। ऐसे में बांग्लादेश, चीन और पूर्वोत्तर भारत से जुड़ी कोई भी चर्चा रणनीतिक महत्व रखती है।

 आरोप, राजनीति और सच्चाई

फिलहाल यह पूरा विवाद आरोपों और राजनीतिक बयानों के इर्द-गिर्द घूम रहा है। भारत सरकार या किसी आधिकारिक एजेंसी ने अब तक इन दावों की पुष्टि नहीं की है।

फिर भी इस बहस ने यह साफ कर दिया है कि सीमा सुरक्षा, जनसांख्यिकीय बदलाव और राष्ट्रीय अखंडता जैसे मुद्दे आने वाले समय में भारतीय राजनीति के केंद्र में बने रहेंगे।

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