केरल : विवादित मुनंबम की 404 एकड़ जमीन उम्मीद पोर्टल पर दर्ज

पूनम शर्मा
केरल की कॉन्ग्रेस गठबंधन वाली सरकार ने मुनंबम की 404 एकड़ जमीन को केंद्र सरकार के ‘उम्मीद’ पोर्टल पर आधिकारिक रूप से दर्ज करा दिया है।केरल में कॉन्ग्रेस की अगुवाई वाले UDF गठबंधन के सत्ता में आते ही वक्फ  बोर्ड ने विवादित मुनंबम की 404 एकड़ जमीन को केंद्र सरकार के ‘उम्मीद’ (Umeed) पोर्टल पर आधिकारिक रूप से दर्ज करा दिया है।

वक्फ बोर्ड ने इस डिजिटल रजिस्ट्रेशन के जरिए खुद को इस पूरी संपत्ति का ‘मुतवल्ली’ यानी सर्वेसर्वा घोषित कर दिया है। सरकार के इस कदम से वहाँ पीढियों से रह रहे 600 से ज्यादा पीड़ित हिंदू और ईसाई परिवारों का भविष्य दांव पर लग गया है। कॉन्ग्रेस सरकार के इस फैसले से स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा है।

मुस्लिम लीग को खुश करने के लिए हिंदुओं के हितों का हनन 

केरल में कॉन्ग्रेस ने मुस्लिम लीग के साथ मिलकर सरकार बनाई है। बीजेपी का  आरोप है कि कॉन्ग्रेस ने जमात-ए-इस्लामी और मुस्लिम लीग को खुश करने के लिए इन 600 मासूम परिवारों की बलि चढ़ा दी है। चुनाव के समय मौजूदा मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने कहा था कि सरकार बनते ही वे वक्फ एक्ट की धारा 97 का इस्तेमाल करेंगे इस विवाद को सुलझा देंगे। लेकिन सरकार बनते ही कॉन्ग्रेस  मुकर गई।

वक्फ बोर्ड को  भंग करने की उठी माँग

मुनबंम भूमि संरक्षण समिति के संयोजक जोसेफ बेनी ने इस रजिस्ट्रेशन को पूरी तरह गैर-कानूनी बताया और  वक्फ बोर्ड ने तय तारीख से पहले ही चोरी-छिपे दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड कर दिए। इससे स्थानीय लोग बेहद नाराज हैं। लोगों का कहना है कि यह कानूनी प्रक्रिया को उलझाने की एक सोची-समझी साजिश है।

आक्रोशित लोग अब मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर वक्फ बोर्ड को तुरंत भंग करने की माँग कर रहे हैं। ईसाई संगठन (ACTS) के प्रतिनिधियों से मुलाकात में मुख्यमंत्री ने सिर्फ दिखाने का  भरोसा दिया है कि वे न्याय करेंगे।

413 दिनों से जारी है पीड़ितों का संघर्ष

मुनंबम इलाके के लोग अपनी जमीन बचाने के लिए पिछले 413 दिनों से रिले भूख हड़ताल और सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। यह पूरा विवाद साल 2019 में शुरू हुआ था। वक्फ बोर्ड ने दावा किया था कि 1950 में मोहम्मद सिद्दीकी सैत ने यह जमीन फारूक कॉलेज को दान दी थी। इसके बाद साल 2021 में पीड़ितों से जमीन का टैक्स लेना भी बंद कर दिया गया था।

हाई कोर्ट ने कहा था- ‘जमीन हड़पने की तरकीब’

इस मामले में अक्टूबर 2025 को केरल हाई कोर्ट ने वक्फ बोर्ड के दावे को पूरी तरह खारिज किया था। कोर्ट ने इसे ‘जमीन हड़पने की तरकीब’ करार दिया था। हालाँकि, बाद में वक्फ समर्थक इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चले गए।

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल हाई कोर्ट के आदेश पर स्टे लगाया हुआ है। अदालती कार्यवाही के बीच ही कॉन्ग्रेस सरकार के आते ही वक्फ बोर्ड ने राष्ट्रीय रिकॉर्ड में अपना दावा ठोक दिया है, जिसने कॉन्ग्रेस के हिंदू विरोधी चेहरे को एक बार फिर बेनकाब कर दिया है।

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