- भारत अब पूरी तरह नक्सलवाद मुक्त, देश का कोई भी जिला नक्सल प्रभावित नहीं।
- सुरक्षा अभियान, इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास, आत्मसमर्पण नीति, आदिवासी कल्याण और बेहतर शासन से बदलाव।
- 2010 में 1,936 नक्सली घटनाएं—2026 में केवल 33; 720 से घटकर 11 मौतें।
- 2014-2026 के बीच ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट, डबल बुल, थंडरस्टॉर्म जैसे कई बड़े अभियान से नक्सली नेटवर्क ध्वस्त।
- surrendered नक्सली कैडर को पुनर्वास, आर्थिक सहायता, बच्चों को निःशुल्क शिक्षा का लाभ।
- सड़क, मोबाइल टावर, बैंक, स्कूल, हेल्थ सेंटर व अन्य सुविधाओं का दूरदराज के इलाकों तक विस्तार।
- आदिवासी युवाओं के लिए स्किल ट्रेनिंग, रोजगार, आवास और सामाजिक समावेशन पर विशेष जोर।
- बस्तर जैसे कभी नक्सल केंद्र रहे क्षेत्रों में अब सड़क, बैंक, स्कूल, मोबाइल कनेक्टिविटी और विकास तेज।
समग्र समाचार सेवा
दिल्ली, 9 अगस्त :भारत ने नक्सलवाद के खिलाफ ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली है। अब देश का कोई भी जिला नक्सल प्रभावित नहीं है।
यह परिवर्तन सुरक्षा अभियानों, आधारभूत ढांचे के विस्तार, आत्मसमर्पण व पुनर्वास नीति, आदिवासी कल्याण और सुशासन के संयुक्त प्रयासों से संभव हुआ।
2010 में जहां 1,936 नक्सली घटनाएं दर्ज हुई थीं, वहीं 2026 में यह संख्या घटकर केवल 33 रह गई। मौतों में भी भारी कमी आई है।
ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट, ऑपरेशन डबल बुल, ऑपरेशन थंडरस्टॉर्म जैसे अभियानों ने नक्सली नेटवर्क को कमजोर किया।
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास के लिए आर्थिक सहायता, नौकरी, बच्चों को शिक्षा, आवास जैसी योजनाएं चलाई गईं।
देश के दूरस्थ इलाकों में सड़क, बैंक, मोबाइल टावर और स्कूलों की सुविधाएं बढ़ाई गईं।
बस्तर सहित कई पुराने नक्सल गढ़ अब विकास और शांति के नए केंद्र बन गए हैं।
भारत सरकार ने पूरे सिस्टम को एकीकृत कर नीति, सुरक्षा, समावेशी विकास और आदिवासी कल्याण के जरिए यह लक्ष्य हासिल किया।
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