एनसीबी का ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’, 38 ठिकानों पर छापेमारी

पूर्वोत्तर में अंतरराष्ट्रीय नार्को-सिंडिकेट पर मोदी सरकार का बड़ा प्रहार, 100 करोड़ के हवाला नेटवर्क का पर्दाफाश और 1,424 बैंक खाते फ्रीज।

  • एनसीबी का ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’, 38 ठिकानों पर भीषण छापेमारी।
  • असम, मिजोरम और मणिपुर में अंतरराष्ट्रीय नार्को-कार्टेल ध्वस्त।
  • 100 करोड़ का हवाला कारोबार उजागर, 1,424 बैंक खाते फ्रीज।

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 27 अक्तूबर: भारत सरकार की नशीले पदार्थों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) नीति के तहत नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राज्य पुलिस बलों ने मिलकर पूर्वोत्तर भारत में मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट पर सर्जिकल स्ट्राइक की है। ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ (Operation Trident) नाम के इस विशेष अभियान के तहत पूर्वोत्तर के तीन प्रमुख राज्यों—असम, मिजोरम और मणिपुर—में एक साथ 38 संवेदनशील स्थानों पर भीषण छापेमारी की गई। इस कार्रवाई में एक वैश्विक नार्को-कार्टेल के पूरे तंत्र और वित्तीय ढांचे को जमींदोज कर दिया गया है।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने इस ऐतिहासिक सफलता पर केंद्रीय एजेंसियों और तीनों राज्यों की एंटी-नारकोटिक्स टीमों को बधाई दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई 31 दिसंबर 2029 तक देश से नशीले पदार्थों के हर नेटवर्क को जड़ से उखाड़ फेंकने के भारत के दृढ़ संकल्प का प्रमाण है।

हवाला नेटवर्क का भंडाफोड़: 1,424 बैंक खाते फ्रीज और संपत्ति जब्त

‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ केवल नशीले पदार्थों की जब्ती तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने तस्करों की आर्थिक कमर तोड़ कर रख दी है। विस्तृत वित्तीय फॉरेंसिक जांच में 100 करोड़ रुपये के अवैध हवाला लेनदेन का पता चला है। केंद्रीय एजेंसियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए इस नेटवर्क से जुड़े 1,424 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है। इसके अलावा, 17.82 करोड़ रुपये की अवैध रूप से अर्जित चल-अचल संपत्तियों को कुर्क और जब्त किया गया है।

छापेमारी के दौरान सुरक्षा बलों ने 500 डेटोनेटर (विस्फोटक सामग्री), 12 लाख रुपये नकद और कई महत्वपूर्ण डिजिटल दस्तावेज बरामद किए हैं। अभियान के दौरान इस सिंडिकेट से जुड़े 18 प्रमुख तस्करों और सहयोगियों को गिरफ्तार किया गया है।

‘डेथ ट्रायंगल कॉरिडोर’ के जरिए होती थी अंतरराष्ट्रीय तस्करी

जांच में खुलासा हुआ है कि यह खतरनाक अंतरराष्ट्रीय गिरोह ‘डेथ ट्रायंगल कॉरिडोर’ (Death Triangle Corridor) के जरिए भारत, म्यांमार और बांग्लादेश की सीमाओं से मेथामफेटामाइन, हेरोइन और अन्य घातक मादक पदार्थों की तस्करी करता था।

यह नेटवर्क म्यांमार से नशीली दवाओं की खेप मंगवाकर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के रास्ते मुख्य भूभाग और बांग्लादेश में सप्लाई करता था। ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ के तहत मिजोरम के आइजॉल, चम्फाई और भारत-म्यांमार सीमा पर स्थित रणनीतिक व्यापारिक कस्बे जोखॉथर में छापेमारी की गई। इसके साथ ही मणिपुर के चूड़ाचांदपुर और असम के कछार क्षेत्र के प्रमुख ट्रांजिट कॉरिडोर में बने गुप्त ठिकानों पर एक साथ धावा बोला गया।

त्रिआयामी समन्वय: NCB, ED और राज्य पुलिस की संयुक्त रणनीति

23 अक्टूबर 2026 की सुबह शुरू हुआ यह अभियान बहु-एजेंसी समन्वय का एक आदर्श उदाहरण है। केंद्रीय और राज्य एजेंसियों ने कई हफ्तों तक खुफिया जानकारियों का विश्लेषण किया। 38 संयुक्त टीमों ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद इस तरह से कार्रवाई की कि किसी भी आरोपी को भागने या अवैध संपत्तियों को छिपाने का मौका नहीं मिला।

यह अभियान भारत के ‘नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट (2026-2029)’ की नई रणनीति के तहत अंजाम दिया गया। अब सरकार का फोकस केवल ड्रग्स पकड़ने पर नहीं, बल्कि तस्करी करने वाले सिंडिकेट के लॉजिस्टिक्स, मुखौटा कंपनियों (Shell Companies) और हवाला कारोबार को पूरी तरह नष्ट करने पर है।

म्यांमार के सरगना थांगसिंतुआंग और उसके नेटवर्क का पर्दाफाश

एनसीबी और प्रवर्तन निदेशालय की गहन पड़ताल से म्यांमार स्थित मुख्य सरगना थांगसिंतुआंग उर्फ चिंतुआंग उर्फ त्लुआंगा का पर्दाफाश हुआ। वह एनडीपीएस (NDPS) अधिनियम के तहत 10 से अधिक मामलों में वांछित था, जिसे लगातार निगरानी के बाद दिल्ली से गिरफ्तार किया गया।

जांच के पिछले चरणों में गिरोह के मुख्य सहयोगियों—वुंगखानथॉना (लॉजिस्टिक्स समन्वयक), ललरमपारी (प्रमुख हवाला संचालक) और अबू सालेह उर्फ सैफुद्दीन (असम कॉरिडोर प्रमुख)—को पहले ही गिरफ्तार कर पीआईटी-एनडीपीएस (PIT-NDPS) कानून के तहत निरुद्ध किया जा चुका है। इन्हीं से मिली कड़ियों के आधार पर ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ की अंतिम रूपरेखा तैयार की गई थी।

निष्कर्ष

‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ ने यह साबित कर दिया है कि भारत की सीमाएं अब अंतरराष्ट्रीय नार्को-तस्करों के लिए सुरक्षित नहीं हैं। गृह मंत्रालय के सीधे मार्गदर्शन में चलाए गए इस अभियान से पूर्वोत्तर में सक्रिय कई देशविरोधी और अवैध वित्तीय नेटवर्क ध्वस्त हो गए हैं। नशीले पदार्थों के पूरी तरह खात्मे तक भारत का यह कड़ा प्रहार निरंतर जारी रहेगा।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.