न्यू इंग्लैंड के भारतीय-अमेरिकी समुदाय ने मनाई पीएम मोदी की 25 वर्षों की निस्वार्थ जनसेवा की वर्षगांठ
वर्स्टर (Worcester) में आयोजित एक खास कार्यक्रम में 1,000 से अधिक लोग जुटे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसेवा की 25 सालों की यात्रा का जश्न मनाया गया और समाज के लिए उत्कृष्ट योगदान देने वाले कम्युनिटी एंबेसडर्स को सम्मानित किया गया।
- 25 वर्षों की जनसेवा: न्यू इंग्लैंड के भारतीय-अमेरिकी समुदाय ने पीएम मोदी के सार्वभौमिक सेवाकाल के 25 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाया।
- सिल्वर जुबली का जश्न: वर्स्टर में आयोजित इस रजत जयंती समारोह में 1,000 से अधिक लोग शामिल हुए।
- अग्रणियों का सम्मान: 22 व्यक्तियों और दंपतियों को ‘कम्युनिटी एंबेसडर’ के रूप में सम्मानित किया गया।
- मुख्य विषय: कार्यक्रम में भारत-अमेरिका संबंधों, प्रवासी भारतीयों की भागीदारी और ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को रेखांकित किया गया।
समग्र समाचार सेवा
वर्स्टर, मैसाचुसेट्स (25 अक्टूबर): न्यू इंग्लैंड के भारतीय-अमेरिकी समुदाय ने शनिवार शाम मैसाचुसेट्स के वर्स्टर स्थित ‘डोहरटी मेमोरियल हाई स्कूल’ में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक सेवाकाल की रजत जयंती (Silver Jubilee) के उपलक्ष्य में रखा गया था। इस समारोह में पूरे क्षेत्र से 1,000 से अधिक लोग, परिवार, सामुदायिक नेता और शुभचिंतक एकजुट हुए।
“यूएस–इंडिया: प्रोग्रेस टुगेदर” (भारत-अमेरिका: साथ मिलकर प्रगति) थीम पर आधारित इस कार्यक्रम में 1947 में आजादी के बाद से भारत की विकास यात्रा और 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनने के उसके संकल्प पर चर्चा की गई। इसके अलावा, दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों—भारत और अमेरिका—के बीच मजबूत होती रणनीतिक साझेदारी को भी रेखांकित किया गया।
समारोह की शुरुआत स्वागत भाषण, पारंपरिक दीप प्रज्वलन और प्रवीण मोहिंद्रू द्वारा गाए गए देशभक्ति गीत के साथ हुई, जिसने पूरे माहौल में उत्साह भर दिया।

गुजरात के मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री तक का सफर
वक्ताओं ने 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पीएम मोदी के सफर की शुरुआत और 2014 में देश के प्रधानमंत्री बनने तक की उनकी यात्रा को याद किया। उनके नेतृत्व के मूल मंत्र “सबका साथ, सबका विकास” को इस पूरी यात्रा का मुख्य आधार बताया गया।
कार्यक्रम में भारत की आर्थिक, तकनीकी, स्वास्थ्य और वैज्ञानिक प्रगति के कई प्रमुख पड़ावों को सामने रखा गया:
भारत का दुनिया की 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से निकलकर शीर्ष 5 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होना।
यूपीआई (UPI) के माध्यम से डिजिटल भुगतान का व्यापक विस्तार।
वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए 50 करोड़ से अधिक जन-धन बैंक खाते खोलना।
आयुष्मान भारत योजना, चंद्रयान-3 की चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर ऐतिहासिक लैंडिंग और भारत की G20 अध्यक्षता।
इन सभी उपलब्धियों को 2047 तक एक विकसित भारत के निर्माण के बड़े लक्ष्य से जोड़ा गया और प्रवासी भारतीयों को देश के उज्ज्वल भविष्य में लगातार योगदान देने के लिए प्रेरित किया गया।

भारत की प्रगति में भारतीय-अमेरिकियों की भूमिका
एक विशेष सत्र के दौरान अमेरिका में रह रहे लगभग 50 लाख भारतीय-अमेरिकियों के योगदान और दोनों देशों के रिश्तों पर चर्चा हुई।
वक्ताओं ने भारतीय समुदाय को भारत और अमेरिका के बीच एक मजबूत पुल बताया, जो निवेश, उद्यमिता (Entrepreneurship), परोपकार, ज्ञान-साझाकरण और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय संस्कृति, योग व मूल्यों के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
एक वक्ता ने कहा, “2047 तक भारत को विकसित बनाने की यात्रा सिर्फ भारत का मिशन नहीं है, यह हमारा भी मिशन है।”
चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि भारतीय-अमेरिकी आर्थिक साझेदारी को मजबूत करके, शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देकर और अधिक से अधिक अमेरिकियों को भारत की सांस्कृतिक विरासत व विकास के अवसरों से जोड़कर दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जा सकते हैं।
अभिषेक सिंह ने याद की न्यूयॉर्क में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात
भारतीय-अमेरिकी समुदाय के नेता अभिषेक सिंह ने 2015 में न्यूयॉर्क में प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई अपनी 30 मिनट की मुलाकात के अनुभव साझा किए।
अभिषेक ने बताया कि जब प्रधानमंत्री को पता चला कि वे बोस्टन से हैं, तो उन्होंने याद किया कि सरकारी पद संभालने से पहले वे खुद बोस्टन और अमेरिका के लगभग 25 राज्यों की यात्रा कर चुके थे। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री भारतीय-अमेरिकियों की चुनौतियों को बहुत गहराई से समझते हैं।
अभिषेक सिंह के अनुसार, पीएम मोदी ने बोस्टन के शैक्षणिक समुदाय से सरकार की ज्ञान (GYAN) पहल से जुड़ने का आग्रह किया था, जिसके तहत विदेशी शोधकर्ताओं और प्रोफेसरों को भारतीय विश्वविद्यालयों में पढ़ाने के लिए आमंत्रित किया जाता है।
प्रधानमंत्री ने भारतीय-अमेरिकियों को भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में निवेश करने और अपने अमेरिकी दोस्तों व उनके परिवारों को ‘इन्क्रेडिबल इंडिया’ (अतुल्य भारत) का अनुभव कराने के लिए भारत लाने का सुझाव भी दिया था।
अभिषेक ने कहा, “हममें से हर व्यक्ति, चाहे छोटे स्तर पर हो या बड़े स्तर पर, भारत का ब्रांड एंबेसडर और हमारे दो महान देशों के बीच एक सेतु बन सकता है।”

सामुदायिक राजदूतों (Community Ambassadors) का सम्मान
इस समारोह का एक मुख्य आकर्षण उन विशिष्ट सदस्यों को ‘कम्युनिटी एंबेसडर’ के रूप में सम्मानित करना था, जिन्होंने मानवता की सेवा और समाज के कल्याण के लिए उत्कृष्ट कार्य किए हैं।
सम्मानित होने वाले महानुभाव:
प्रमोद पांडे
सुनैना और कमल चौहान
प्रवीण कुमारी और नरेश कुमार
डॉ. स्नेहिल लक्कड़
बिपिन पारिख
कार्तिक शाह
गिरीश मेहता
सुरेन्द्र और किरण नाथ
सुरेन्द्र नागपाल
ललित और मीनाक्षी शिंदे
जितेन्द्र शर्मा
चंद्रकांत और दक्षाबेन पटेल
किरीटकुमार सूर्या
संजय और मनीषा पटेल
राजेंद्रकुमार धनजीभाई और पूर्वी पटेल
रेखा और विनोद गुप्ता
रवि और सुधा सरिन
कौशिक और चारू पटेल
परवीन और मोनिका कुमार मोहिंद्रू
अनिल और हिमानी चावला
प्रमोद कुमार और हेमा रानी
राजेश और सुधा भूटानी
यह सम्मान समाज सेवा में उनके योगदान और भारतीय-अमेरिकी समुदाय को सशक्त बनाने के प्रयासों का एक उत्सव था।
केक काटने और गरबा के साथ समापन
कार्यक्रम का समापन एक शानदार केक-कटिंग सेरेमनी और उसके बाद ‘काउंसिल ऑफ इंडियन फाइन आर्ट्स’ के नेतृत्व में आयोजित जीवंत गरबा नृत्य के साथ हुआ। उपस्थित लोगों ने संगीत, नृत्य और एकजुटता के उत्साह के साथ इस पल का भरपूर आनंद लिया।
इस पूरे आयोजन ने भारत की विकास यात्रा, प्रवासी भारतीयों के अमूल्य योगदान और भारत-अमेरिका के प्रगाढ़ होते संबंधों को एक नए मंच पर लाकर खड़ा किया। आयोजकों ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि 2047 तक ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने में प्रवासी भारतीयों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रहेगी।
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