राष्ट्रपति मुर्मु ने प्रदान किए राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार
शिक्षक दिवस के पावन अवसर पर विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय समारोह, देश भर के चुनिंदा शिक्षकों को उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए किया गया सम्मानित।
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शिक्षक दिवस के अवसर पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्रदान किए।
- इस वर्ष देश भर से चुने गए उत्कृष्ट स्कूल शिक्षकों के साथ-साथ उच्च शिक्षा संस्थानों और पॉलीटेक्निक के शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया।
- राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि एक विकसित भारत (Viksit Bharat) के निर्माण और देश को ज्ञान की महाशक्ति बनाने में शिक्षकों की भूमिका सबसे अहम है।
नई दिल्ली, 6 सितंबर: भारत में हर साल 5 सितंबर को पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के उपलक्ष्य में ‘शिक्षक दिवस’ (Teachers’ Day) बहुत ही धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष भी शिक्षक दिवस के अवसर पर नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में एक अत्यंत गरिमामयी राष्ट्रीय पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया। देश की महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने अपने करकमलों से देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से चुनकर आए प्रबुद्ध शिक्षकों को ‘राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026’ (National Teachers Awards 2026) से सम्मानित किया। इस दौरान शिक्षा मंत्रालय के तमाम बड़े अधिकारी और गणमान्य लोग भी मौजूद रहे।
विभिन्न श्रेणियों में शिक्षकों का हुआ चयन
इस वर्ष के राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कारों का दायरा काफी व्यापक रहा है। स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में बेहतरीन कार्य करने वाले कुल 48 शिक्षकों को इस राष्ट्रीय सम्मान के लिए चुना गया था, जिनमें देश के 27 राज्यों, 7 केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों के अंतर्गत आने वाले संस्थानों के शिक्षक शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के दृष्टिकोण के अनुरूप उच्च शिक्षा संस्थानों (HEIs) और पॉलीटेक्निक संस्थानों के 21 फैकल्टी सदस्यों को भी उच्च शिक्षा श्रेणी में सम्मानित किया गया। इन शिक्षकों का चयन उनकी शिक्षण प्रभावशीलता, अनुसंधान (research), नवाचार (innovation) और समाज के प्रति उनके उल्लेखनीय योगदान को ध्यान में रखते हुए एक पारदर्शी ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिए किया गया था।
शिक्षा ही समानता और प्रगति का आधार: राष्ट्रपति
समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देश के सभी शिक्षकों को इस विशेष अवसर की बधाई दी और उनके अमूल्य योगदान की सराहना की। राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा ही हमारे संविधान में निहित ‘अवसर की समानता’ के आदर्श को वास्तविक जीवन में साकार करने का सबसे प्रभावी और सशक्त माध्यम है। उन्होंने प्राथमिक विद्यालयों में ड्रॉपआउट (बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों) की दर में आई भारी गिरावट का जिक्र करते हुए इसका पूरा श्रेय शिक्षकों की कड़ी मेहनत और समर्पण को दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों के शुरुआती दौर में उनके बौद्धिक, शारीरिक और नैतिक विकास पर ध्यान देकर शिक्षक उन्हें देश का एक आदर्श नागरिक बनाते हैं।
विकसित भारत के संकल्प में शिक्षकों की भूमिका
राष्ट्रपति मुर्मु ने इस बात को रेखांकित किया कि आने वाले समय में भारत को दुनिया की ‘स्किल कैपिटल’ और एक ज्ञान महाशक्ति (Knowledge Superpower) के रूप में स्थापित करना हमारी सर्वोच्च राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में शामिल है। ‘विकसित भारत’ (Viksit Bharat) के लक्ष्य को केवल एक विश्व स्तरीय शिक्षा प्रणाली के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है, और इस पूरी प्रणाली की रीढ़ हमारे शिक्षक ही हैं। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, दूर-दराज के गांवों या विशेष क्षमताओं वाले बच्चों का हाथ थामकर उन्हें आगे बढ़ाना शिक्षकों का सबसे बड़ा दायित्व है। इस भव्य आयोजन ने देश भर के शिक्षक समुदाय में एक नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया है।
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