पूनम शर्मा
ODNI द्वारा जारी किए गए दस्तावेज़ों का महत्व
मंगलवार को, राष्ट्रीय खुफिया निदेशक कार्यालय (ODNI) ने COVID-19 महामारी की उत्पत्ति से जुड़ी कई पहले वर्गीकृत दस्तावेज़ और संचार सार्वजनिक किए। ये दस्तावेज़ अमेरिकी खुफिया समुदाय के विश्लेषण को सामने लाते हैं, खासतौर पर डॉ. एंटनी फाउची की भूमिका पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जो राष्ट्रीय एलर्जी और संक्रामक रोग संस्थान के पूर्व निदेशक हैं।
फाउची द्वारा वुहान वायरोलॉजी संस्थान को फंडिंग
लीक हुई बातचीत में दावा किया गया है कि डॉ. फाउची ने लाखों डॉलर अमेरिकी करदाता के पैसे से चीन के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (WIV) में चमगादड़ कोरोनावायरस पर रिसर्च के लिए दिए। इस फंडिंग ने खुफिया आकलन और कांग्रेस में दी गई गवाही पर प्रभाव डाला।
लैब-लीक सिद्धांत और इसके विरोध में खुफिया दबाव
व्हिसलब्लोअर के बयान बताते हैं कि लैब-लीक थ्योरी की जांच करने वाले विश्लेषकों को प्रतिशोध का सामना करना पड़ा। इसका मतलब है कि वैकल्पिक COVID-19 के उत्पत्ति के विचारों को दबाने की कोशिश हुई। ODNI के दस्तावेज़ों में कहा गया है कि फाउची के समर्थक वैज्ञानिक दृष्टिकोणों को प्राथमिकता दी गई, जिससे खुफिया निष्कर्ष उन्हीं के आधार पर बनाए गए।
गेन-ऑफ़-फंक्शन रिसर्च पर विवाद
कुछ पूर्व खुफिया विश्लेषकों और आलोचकों ने यह शोध गेन-ऑफ़-फंक्शन के रूप में वर्णित किया है, जिसमें वायरस के गुणों को बदलकर उनकी संक्रामकता या बीमारी फैलाने की क्षमता को समझा जाता है। यदि यह रिसर्च गलत तरीके से की गई, तो यह जोखिम भरा हो सकता है।
फाउची की कांग्रेस में गवाही और ODNI के दस्तावेज़ों के बीच विरोधाभास
जारी दस्तावेज़ों के अनुसार, फाउची ने कांग्रेस में शपथपूर्वक कहा था कि उन्हें खुफिया समुदाय की COVID-19 लैब-लीक चर्चा की जानकारी नहीं थी। लेकिन ODNI के नए सबूत यह दर्शाते हैं कि फाउची और खुफिया कर्मियों के बीच संपर्क हुआ था, जो उनके बयान के विपरीत है।
खुफिया एजेंसियों में खुली चर्चा की कमी
व्हिसलब्लोअर ने बताया कि कुछ खुफिया एजेंसियों में लैब-लीक थ्योरी पर खुली चर्चा को हतोत्साहित किया गया। जिन्होंने लैब-लीक की जांच पर जोर दिया, उन्हें करियर में नुकसान, बहिष्कार या नौकरी से निकाला जाना पड़ा।
पारदर्शिता और आगे की कार्रवाई
ODNI ने कहा कि व्हिसलब्लोअर की शिकायतों को खुफिया समुदाय के इंस्पेक्टर जनरल को समीक्षा और कार्रवाई के लिए भेजा गया है। ये दस्तावेज़ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 2018 के निर्देश के तहत जारी किए गए हैं, जिनका मकसद अमेरिकी सरकारी जानकारी में पारदर्शिता बढ़ाना था।
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